नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर चीन के तियानजिन पहुंचे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. इस दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जो सात साल बाद दोनों नेताओं की पहली ऐसी मुलाकात थी. बैठक के बाद PM मोदी ने इसे रिश्तों में सकारात्मक प्रगति का प्रतीक बताया और चीन के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया.
PM मोदी ने बैठक के बाद कहा, "मैं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उनके निमंत्रण और इस सार्थक मुलाकात के लिए धन्यवाद देता हूं. पिछले साल रूस के कज़ान में ब्रिक्स समिट के दौरान हमारी चर्चा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी. सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है, जो हमारे संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है."
उन्होंने आगे कहा कि विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन पर बनी सहमति, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों का फिर से शुरू होना सकारात्मक कदम हैं. "हमारे सहयोग से भारत और चीन की 2.8 अरब जनता के हित जुड़े हैं, जो वैश्विक कल्याण के लिए भी एक मजबूत आधार बनाएंगे. हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं," PM मोदी ने जोड़ा.
SCO शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में आयोजित हो रहा है, जिसमें सभी सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं. इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद हैं, और उनकी PM मोदी और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की संभावना है. अमेरिका की हालिया टैरिफ नीतियों के बीच इन तीनों नेताओं की चर्चा को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन, 2020 की गलवान झड़प के बाद तनाव कम करने और संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं. PM मोदी की यह यात्रा और शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ करने का भी संकेत देती है.