नई दिल्ली: 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एक सटीक और विनाशकारी हवाई हमला किया. इस हमले में कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख नेता और 1999 के कंधार हाईजैक कांड के मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर उर्फ रऊफ अजहर के मारे जाने की खबर सामने आई है. रऊफ, जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का छोटा भाई था और भारत के सबसे वांछित आतंकवादियों में से एक था. इस हमले में रऊफ के साथ-साथ मसूद अजहर के परिवार के 14 अन्य सदस्यों और करीबी सहयोगियों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है, जिसने पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को गहरा झटका दिया है.
रऊफ अजहर की आतंकी गतिविधियों का इतिहास लंबा और खतरनाक रहा है. 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण की साजिश में उसकी प्रमुख भूमिका थी. इस हाईजैक में आतंकियों ने विमान को काठमांडू से अपहृत कर कंधार, अफगानिस्तान ले गए थे, जहां तालिबान का शासन था. रऊफ ने अपने भाई मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख, और मुश्ताक अहमद जरगर की रिहाई के लिए इस अपहरण की योजना बनाई थी. भारत सरकार को यात्रियों की जान बचाने के लिए इन तीनों आतंकियों को रिहा करना पड़ा था. इसके बाद मसूद और रऊफ ने जैश-ए-मोहम्मद को और मजबूत किया, जिसने 2001 में भारतीय संसद पर हमला, 2016 में पठानकोट एयरबेस हमला, और 2019 में पुलवामा हमले जैसे कई आतंकी कांडों को अंजाम दिया. रऊफ अजहर अमेरिका का भी मॉस्ट वांटेड आतंकी था.
'ऑपरेशन सिंदूर' 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. भारतीय सेना और वायुसेना के संयुक्त अभियान में बहावलपुर के सुभान अल्लाह कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया, जो जैश का मुख्यालय था. हमले में रऊफ अजहर के अलावा मसूद की बहन, उनके बच्चों, और अन्य करीबी सहयोगियों की मौत हुई. मसूद अजहर ने खुद एक बयान में 10 परिजनों और चार सहयोगियों की मौत की पुष्टि की, हालांकि सूत्रों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 14 है. मसूद ने इस हमले पर दुख जताते हुए कहा, "काश मैं भी मर जाता."
रऊफ अजहर जैश का डिप्टी कमांडर था और संगठन की आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था. उसका मारा जाना भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक बड़ी जीत माना जा रहा है. हालांकि, मसूद अजहर के इस हमले के समय घर पर मौजूद न होने और उसके जिंदा होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है. यह हमला न केवल जैश-ए-मोहम्मद के लिए, बल्कि पाकिस्तान के आतंकी ढांचे के लिए भी एक करारा झटका है. भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है.