Kasganj gangrape case: एक महीने पहले कासगंज में नहर किनारे एक गैंगरेप होता है, जिसमें नाबालिग लड़की के साथ उसके मंगेतर के ही सामने 10 लोग दरिंदगी करते हैं, जिस केस का मुख्य आरोपी बीजेपी नेता अखिलेश प्रताप सिंह उर्फ गब्बर सिंह निकलता है, जो अपने साथियों के साथ मिल कर इस हैवानियत की घटना को अंजाम देता है, इस दौरान ये लोग इस लड़की और उसके प्रेमी से लूटपाट करते हैं. उन्हें बेरहमी से पीटते भी हैं. लेकिन मात्र एक महीने में ही इन लोगों को जमानत मिल जाती है, जिस पर लोगों ने सवाल खड़े करना भी शुरू कर दिया है.
सिर्फ एक महीने में कैसे मिली जमानत
जब इन दरिंदों को गिरफ्तार किया जाता है तो लोगों के अंदर एक उम्मीद जागती है कि आरोपी कोई भी हो, उसका कितना भी रुतबा हो, लेकिन कानून से ऊपर कोई भी नहीं है, लेकिन सिर्फ एक महीना बीतने के बाद ही जब इन लोगों को जमानत मिलती है तो उसी सिस्टम पर सवाल भी खड़े होने लग जाते हैं, लोग पूछने लगते हैं कि पुलिस ने किस तरह का केस बनाया था कि आरोपी नेता को सिर्फ एक ही महीने में जमानत मिल गई. बता दें कि इस केस में गब्बर सिंह समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से मुख्य आरोपी समेत 5 लोगों को जमानत मिल चुकी है. कोर्ट ने 2 लाख के मुचलके पर इन लोगों को जमानत दी है, साथ ही शर्त रखी है कि ये लोग देश छोड़ कर बाहर नहीं जाएंगे और किसी भी तरह से पीड़िता के परिवार को धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे.
अब लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. लोगों ने यहां तक सवाल खड़े किये हैं कि क्या किसी के दवाब में पुलिस ने इस केस को इस तरह पेश किया कि इन लोगों को इतनी जल्दी जमानत मिल गई?