कश्मीर की आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा, साधी सोफ़ी फहमीदा और नाहिदा नसरीन भी दोषी

Amanat Ansari 24 Mar 2026 08:00: PM 2 Mins
कश्मीर की आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा, साधी सोफ़ी फहमीदा और नाहिदा नसरीन भी दोषी

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को यूएपीए (Unlawful Activities (Prevention) Act) के तहत आतंकवाद की गतिविधियों के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई. उनके सहयोगी सोफ़ी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को प्रत्येक को 30-30 वर्ष की कैद की सज़ा दी गई. इस साल 14 जनवरी को इन तीनों को दुहतरान-ए-मिल्लत (DeM) नामक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया था. यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता था.

अदालत ने तीनों को यूएपीए की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जिसमें धारा 18 (षड्यंत्र) और धारा 38 (आतंकवादी संगठन का सदस्य होना) शामिल हैं. उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत भी दोषी पाया गया, जो आपराधिक षड्यंत्र और राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने से संबंधित हैं. अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने, लोगों को संगठित करने और क्षेत्र को अस्थिर करने वाली गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया था.

यह मामला जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ भारतीय अधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है.
इस सज़ा ने राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सरकार के सख्त रवैये को रेखांकित किया है, साथ ही यह भी दिखाया है कि देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाली अवैध गतिविधियों में शामिल होने के क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं.

दुहतरान-ए-मिल्लत पर भारत विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंध

दुहतरान-ए-मिल्लत कश्मीर आधारित एक सर्व-महिला संगठन है, जिसकी स्थापना 1987 में हुई थी. इसका नेतृत्व आसिया अंद्राबी करती हैं. केंद्र सरकार ने इस संगठन पर वर्ष 2004 में Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 के तहत प्रतिबंध लगा दिया था. इस बीच, DeM प्रमुख आसिया अंद्राबी को वर्ष 2018 में NIA ने गिरफ्तार किया था. संगठन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में यूएपीए के तहत जारी अधिसूचना की प्रति माँगते हुए याचिका दायर की थी और अपना नाम आतंकवादी संगठनों की सूची से हटाने का अनुरोध किया था.

हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि याचिकाकर्ता ने कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय का सहारा नहीं लिया था.
2023 के अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि यूएपीए का अध्याय VI धारा 35 के तहत संगठनों को अनुसूची में शामिल करने का प्रावधान करता है.
इसके अलावा, धारा 36 संगठनों को केंद्र सरकार से अपनी नाम सूची से हटाने के लिए आवेदन करने का तंत्र प्रदान करती है, जिसका याचिकाकर्ता ने पीछा नहीं किया.

मामला क्या है?

यह मामला पाकिस्तान और आतंकवादी संस्थाओं के समर्थन से देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित है. वर्ष 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने आसिया अंद्राबी और उनके सहयोगियों फहमीदा व नसरीन पर आईपीसी और सख्त यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. आरोपियों ने दोषी न होने का दावा किया और मुकदमे का सामना करने की मांग की थी. अदालत ने उन पर आईपीसी की निम्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे...

  • 120-B (आपराधिक षड्यंत्र)
  • 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना)
  • 121-A (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का षड्यंत्र)
  • 124-A (देशद्रोह)
  • 153-A (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना)
  • 153-B (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप/कथन)
  • 505 (जनता में दंगा भड़काने वाले बयान)

यूएपीए के तहत भी आरोप तय किए गए

  • धारा 18 (आतंकवादी कृत्य करने का षड्यंत्र या प्रयास)
  • धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना)
  • धारा 38 (आतंकवादी संगठन का सदस्यता संबंधी अपराध)
  • धारा 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देने संबंधी अपराध)

गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA ने इन तीनों और संगठन के खिलाफ मामला दर्ज किया था. तीनों आरोपियों को अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया था और वे तब से हिरासत में हैं.

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