इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद जहां एक तरफ पूरी दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं, वहीं दूसरी तरफ इस्लामिक देशों के बीच का गहरा आंतरिक मनमुटाव खुलकर सतह पर आ गया है। खामेनेई के जनाजे के मौके पर जहां दुनिया भर के कई देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, वहीं खाड़ी के तीन प्रमुख और प्रभावशाली मुस्लिम देशों— संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन ने इस पूरे कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना ली। इन तीनों देशों की ओर से कोई भी बड़ा नेता या आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल तेहरान नहीं पहुंचा, जिसके बाद वैश्विक मंच पर 'मुस्लिम ब्रदरहुड' और इस्लामिक एकजुटता के दावों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
किन नेताओं ने बनाई दूरी और कौन रहा गायब?
राजनयिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कुवैत के अमीर शेख मशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह और बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा में से कोई भी इस अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ। सिर्फ इतना ही नहीं, इन देशों ने अपने किसी भी वरिष्ठ मंत्री या राजनयिक प्रतिनिधि को भी भेजने से परहेज किया। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के इन तीन अहम सदस्यों की यह बेरुखी ईरान के प्रशासनिक गलियारों में काफी ज्यादा चुभने वाली मानी जा रही है।
आखिर क्यों बनाई इन देशों ने दूरी?
इजरायल और अमेरिका से नजदीकी: यूएई और बहरीन ने 'अब्राहम अकॉर्ड्स' के तहत इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य किए हैं और वे अमेरिका के बेहद करीबी सहयोगी हैं। ईरान की अमेरिका और इजरायल विरोधी नीतियों के कारण ये देश तेहरान के साथ ज्यादा करीब दिखने से कतराते हैं।
बिखरता मुस्लिम ब्रदरहुड?
खामेनेई के अंतिम संस्कार से इन तीनों देशों का गायब रहना यह साफ संकेत देता है कि जब बात देश के हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा की आती है, तो धार्मिक एकजुटता या 'मुस्लिम ब्रदरहुड' के नारे पीछे छूट जाते हैं। मिडिल ईस्ट के विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई के बाद ईरान में जो नया नेतृत्व आएगा, उसके लिए इन खाड़ी देशों के साथ रिश्तों की बर्फ पिघलाना एक बहुत बड़ी और कठिन चुनौती साबित होने वाली है।