कोलकाता: चारों तरफ रोशनी की चकाचौंध, ढाक की गूंज और मां दुर्गा के दर्शन की ललक—कोलकाता में दुर्गापूजा का उल्लास अपने चरम पर था। लाखों लोग अपनों के साथ पंडालों की भव्यता देखने घरों से निकले थे। लेकिन शनिवार शाम उत्तर कोलकाता के चोरबागान में कुदरत के एक झटके और प्रशासनिक बदइंतजामी ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। किसी का जीवनसाथी भीड़ में छूट गया, तो किसी की 17 साल की मासूम बेटी हमेशा के लिए खामोश हो गई।
तबीयत खराब होने की मिली थी खबर, अस्पताल में मिली भाई का शव
उत्तर हावड़ा के सलकिया निवासी 64 वर्षीय विकास भट्टाचार्य अविवाहित थे और पूजा पंडालों की कलाकारी देखने के बेहद शौकीन थे। शनिवार दोपहर करीब 3:30 बजे वे अकेले ही दर्शन के लिए निकले थे। शाम को छोटे भाई तापस भट्टाचार्य के फोन की घंटी बजी। पुलिस ने बताया कि विकास की तबीयत खराब है और वे अस्पताल पहुंचें। घबराए तापस कोलकाता मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो वहां सफेद चादर से ढका एक शव मिला। चेहरे से कपड़ा हटाया तो सामने बड़े भाई विकास थे। रोते हुए तापस ने आरोप लगाया कि संकरे रास्तों और पंडाल में भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम न होने की वजह से उनके भाई की जान गई।
बारिश बनी आफत, संकरी गलियों में बेकाबू हुई भीड़
नदिया जिले के चकदह निवासी राम सरकार अपनी पत्नी के साथ चोरबागान पंडाल देखने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि कतारें पहले से ही भारी थीं कि अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए जो लोग पंडाल से बाहर निकल रहे थे, वे वापस अंदर की ओर भागे और जो बाहर खड़े थे, वे भी अंदर घुसने लगे। आमने-सामने से बढ़े इस दबाव के बीच संकरे रास्ते में भगदड़ मच गई।
लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। इसी आपाधापी में राम का हाथ उनकी पत्नी से छूट गया। जब भीड़ छंटी, तो पत्नी जमीन पर बेसुध पड़ी थीं। राम का आरोप है कि मौके पर न कोई मेडिकल टीम थी और न ही एम्बुलेंस। पुलिस की गाड़ी से अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सहेलियों संग निकली 17 साल की बरनाली कभी घर नहीं लौटी
इस दर्दनाक हादसे ने 17 वर्षीय बरनाली हलदर की जिंदगी भी छीन ली। वह शनिवार शाम 6 बजे अपनी सहेलियों के साथ दुर्गापूजा का आनंद लेने घर से निकली थी। चोरबागान में मची भगदड़ में बरनाली और उसकी सहेली साकू गंभीर रूप से घायल हो गईं और दोनों ने दम तोड़ दिया। बरनाली के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि अगर आयोजकों और प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण व सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया होता, तो आज इन बेकसूरों की जान न जाती।