झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में कलेक्ट्रेट परिसर वकीलों के उग्र प्रदर्शन के दौरान रणक्षेत्र में बदल गया. जिला अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने वीडियो बना रहे जेल चौकी प्रभारी (दरोगा) को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की तथा उनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया. दरोगा ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई. घटना के बाद पुलिस ने चार नामजद वकीलों के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली है.
वकीलों का आरोप है कि उनके साथी अधिवक्ता और संयुक्त सचिव प्रकाशन रोमेश अग्रवाल किसी मुंशी की समस्या को लेकर थाना कोतवाली गए थे, जहां शहर कोतवाल ने उनके साथ अभद्रता की और जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया. शिकायत एसएसपी झांसी से करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद वे जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि कोतवाल कोतवाली, नवाबाद, SHO सीपरी बाजार और जेल अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन, चक्का जाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे.
कलेक्ट्रेट में हुई मारपीट
30 अक्टूबर को जब कलेक्ट्रेट में वकील नारेबाजी कर रहे थे, तब जेल चौकी इंचार्ज अपने साथी सिपाही के साथ मौके पर पहुंचे और मोबाइल से प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे. वीडियो बनता देख आक्रोशित वकीलों ने विरोध किया और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई. आरोप है कि वकीलों के समूह ने जेल चौकी इंचार्ज और उनके साथी के साथ मारपीट की तथा वीडियो बना रहा मोबाइल छीनकर तोड़ डाला. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
4 वकीलों पर FIR
नवाबाद थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर अविनाश, आजाद, दीपू और देवेंद्र नामक चार वकीलों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है. शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी अधिवक्ता देवेंद्र के खिलाफ पहले से कुल 9 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि अविनाश के खिलाफ 2 आपराधिक मामले ज्ञात हुए हैं. अन्य आरोपियों के इतिहास की जांच जारी है. झांसी पुलिस ने भी आधिकारिक रूप से घटना की पुष्टि की है.