मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में कुछ साल पहले एक गैंग चलता था, जिसमें भर्ती होते ही लड़कों को चंदन, काला गमछा और आंखों में सूरमा दिया जाता था. पहली ही मीटिंग में इसका सरगना कहता था कि आंखों में सूरमा लगाकर ऊपर जाओगे तो जन्नत मिलेगी. गले पर काला गमछा लगाकर रखोगे तो यमराज की तरह दिखोगे और माथे पर चंदन लगाकर रखोगे तो ये पता चलेगा कि अतीक, मुख्तार या शहाबुद्दीन ही नहीं, हमारे जैसे कम उम्र के तिलकधारी लड़के का भी सिक्का चलता है.
16 साल की उम्र में ये पहला गैरकानूनी काम करता है और 18 साल की उम्र तक इस पर 9 मुकदमें दर्ज हो जाते हैं, अखबारों में दुर्लभ कश्यप के नाम की सुर्खियां बननी शुरू होती है. सोशल मीडिया पर इसके इतने फोटोज वायरल होते हैं कि पुलिस की नाक में दम हो जाता है. आखिर में वो तारीख आती है जब मध्य प्रदेश पुलिस इसे 27 अक्टूबर 2018 को इसके अड्डे से ही उठा लेती है, तब ये 23 लड़कों के साथ मिलकर बड़ी प्लानिंग बना रहा होता है.
कहते हैं पुलिस की पकड़ में आने के बाद भी इसकी अकड़ ढीली नहीं होती और तब हवालात में इसकी मुलाकात होती है उस वक्त के एसपी सचिन अतुलकर से. जिन्हें लोग बॉडी बिल्डर आईपीएस के नाम से भी जानते हैं, जिनकी आरती करती तस्वीर देखकर कितनी लड़कियां दीवानी हो गई थी, वो इस चूजे से माफिया को देखकर बस एक ही बात कहते हैं कि तुम जेल में ही सेफ है, तुमने कम उम्र में ज्यादा दुश्मनी पाल रखी है. बाहर निकलेगा तो कोई न कोई ताक में बैठा होगा.
ऐसे हुई थी मौत...
ये कहकर एसपी साहब बाहर निकलते हैं, चूंकि ये नाबालिग था तो कोर्ट भी इसलिए लंबी सजा नहीं सुना सकती थी तो साल 2020 में इसे जेल से रिहा कर दिया गया, लेकिन कहते हैं मौत कब, कहां और किससे मुलाकात कर ले ये कहा नहीं जा सकता, जो दूसरों की जिंदगी से खेलता था उसकी अंत की कहानी एक चाय दुकान पर लिखी जा रही थी. वो चाय पीने पहुंचता है, साथ में उसके कुछ गुर्गे भी होते हैं, शहनवाज नाम के लड़के से उसकी बहस होती है, तुरंत कट्टा निकालता है और शहनवाज के गुर्गे दुर्लभ का वो हाल करते हैं कि वो देखने लायक नहीं बचता, पुलिस मौके पर पहुंचती है और सब यही कहते हैं कि एसपी साहब ने पहले ही कहा था मान जा, आज दुर्लभ कश्यप नहीं है, लेकिन 2024 चुनाव में उसकी चर्चा तेजी से हो रही है.
दुर्लभ के नाम पर वोट मांग रहे प्रत्याशी
कहा जा रहा है कि कई स्थानीय प्रत्याशी उसके नाम पर वोट मांग रहे हैं. ये तो आप जानते ही हैं कि इस देश की पुराने दौर की सियासत ने कितने माफिया पैदा किए हैं और अब योगी कितनी तेजी से उन माफियाओं को मिटा रहे हैं. कभी माफिया खुद चुनाव में उतरकर अपने लिए वोट मांगता है, तो कभी अपने बीवी-बच्चों को जीताने की अपील करता है, लेकिन यहां कहानी उल्टी नजर आ रही है.
वहीं आज भी दुर्लभ कश्यप के परिवार वाले यही कहते हैं कि हमारे बच्चे को इसलिए नहीं रहने दिया, क्योंकि वो तिलक लगाता था. लेकिन सवाल ये है कि आप चाहे तिलक लगाएं या टोपी, अगर दिल में इंसानियत ही नहीं है तो फिर इन बातों का क्या मतलब है. अपराधी हमेशा अपराधी होता है, उसकी कोई जाति-मजहब या पंथ नहीं होती और ये बात हर उस नेता को समझना होगा, जो ऐसे लोगों को संरक्षण देते हैं, बढ़ावा देते हैं.