जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित रस मंडल जगन्नाथ मंदिर में आस्था और आधुनिकता का अनोखा मेल देखने को मिला. स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों के अनवसर काल (विश्राम अवधि) पूरा होने पर वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का पारंपरिक स्वास्थ्य परीक्षण किया. जांच के बाद उन्हें स्वस्थ घोषित कर दिया गया, जिसके साथ ही भक्तों में उत्साह का माहौल छा गया और रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर शुरू हो गईं.
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भगवान को मरीज की तरह सेवा
मान्यता के अनुसार, स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को 'दिव्य बुखार' आता है. इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भगवान की सेवा एक मरीज की तरह की जाती है. औषधीय काढ़ा, जड़ी-बूटियां और विशेष आहार अर्पित किए जाते हैं.
इस बार डॉ. राजनेश श्रीवास्तव, डॉ. स्मिता श्रीवास्तव, डॉ. अजीत कपूर, डॉ. अशोक अस्थाना समेत कई वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने औपचारिक जांच की. स्वस्थ घोषित होने के बाद भगवान को परवल का रस और खिचड़ी का प्रसाद चढ़ाया गया, जो उनकी शक्ति वापसी का प्रतीक माना जाता है.
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग भारतीय संस्कृति की इस अनूठी मिसाल की तारीफ कर रहे हैं. सदियों पुरानी आस्था को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़ने वाली यह परंपरा एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है. जय जगन्नाथ! रथ यात्रा की धूम अब शुरू होने वाली है.