लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अलीगंज स्थित निजी कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए. घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपने अगले दिन के सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए. उन्हें आगरा और हाथरस के दौरे पर जाना था, लेकिन अग्निकांड के फॉलोअप और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी के लिए उन्होंने राजधानी में ही रहने का फैसला किया.
घटना स्थल का निरीक्षण करने और घायलों का हाल जानने के लिए केजीएमयू पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे अपने सरकारी आवास पहुंचे, जहां उन्होंने तत्काल उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक में शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फायर, नगर विकास तथा संबंधित विभागों के जिम्मेदार अफसर मौजूद रहे.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए. उन्होंने अधिकारियों से घटना के हर पहलू की विस्तृत जांच कराने और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि जिस भवन में आग लगी, वह वर्ष 2014 से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग में था. हालांकि, नगर निगम के रिकॉर्ड में वर्ष 2022 से ही उससे कमर्शियल हाउस टैक्स लिया जा रहा था. इस जानकारी के बाद भवन की वैधता, मानचित्र, अग्नि सुरक्षा मानकों और विभागीय निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि प्रदेश भर में ऐसे व्यावसायिक भवनों की जांच अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों का सत्यापन किया जाए. वहीं, प्रशासनिक स्तर पर यह पता लगाने की भी कोशिश की जा रही है कि आखिर वर्षों से व्यावसायिक उपयोग के बावजूद भवन से जुड़े नियमों का पालन क्यों नहीं कराया गया. लखनऊ अग्निकांड अब केवल आग लगने की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है.