Lucknow Coaching Fire : , लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग संस्थान में भीषण आग गई. अबतक बिल्डिंग से 15 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन सवाल यह है कि आखिर राजधानी में बार-बार आग की बड़ी घटनाएं क्यों हो रही हैं.
लखनऊ एक बार फिर बड़े अग्निकांड की वजह से सुर्खियों में है. अलीगंज थाना क्षेत्र के उषा मेहता मार्ग स्थित बी/2 सेक्टर-डी में चल रहे एक निजी कोचिंग संस्थान में अचानक भीषण आग लग गई. आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई.
सूचना मिलते ही फायर विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की इमारतों और दुकानों को खाली कराया गया. राहत की बात यह रही कि अब तक 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है.
लेकिन यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि राजधानी की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ में कई बड़े अग्निकांड हो चुके हैं. 2025 में पारा इलाके की प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी आग ने भारी नुकसान पहुंचाया था. उसी साल अलीगंज के एक चार मंजिला भवन में आग लगी थी, जिसमें पांच फायरकर्मी तक घायल हो गए थे. 2026 में विकास नगर की झुग्गी बस्ती में लगी आग ने दर्जनों परिवारों को बेघर कर दिया. कृष्णा नगर बाजार में आग लगने से दो दर्जन से ज्यादा दुकानें जलकर राख हो गई थीं.
और फिर वो लेवाना होटल अग्निकांड... जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था. चार लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे. फायर सेफ्टी ऑडिट की बात हुई, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई और बड़े-बड़े दावे किए गए कि अब ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी.
लेकिन आज फिर राजधानी में आग लगी है. सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम अपने निरीक्षण ठीक से कर रहा है. क्या एलडीए ने व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की. क्या फायर एनओसी सिर्फ कागजों का खेल बनकर रह गई है. मुख्यमंत्री आदेश दे सकते हैं, सख्ती दिखा सकते हैं, लेकिन हर बिल्डिंग, हर कोचिंग, हर कॉम्प्लेक्स की निगरानी तो स्थानीय सिस्टम को ही करनी होगी. अगर नगर निगम, एलडीए और संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो शायद राजधानी को बार-बार ऐसे अग्निकांड न देखने पड़ते.