आरा: बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की बहन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है. बहन का दावा है कि उनके भाई को पुलिस ने पांच गोलियां सटा-सटा कर मारीं, जिसमें प्राइवेट पार्ट पर भी गोली लगाई गई. बहन ने मीडिया से बातचीत में कहा, ''पुलिस ने मेरे भाई को बुरी तरह पीटा और फिर नजदीक से गोलियां चलाईं. एक गोली शरीर के आर-पार हो गई, जबकि चार अंदर ही रह गईं. प्राइवेट पार्ट पर भी गोली मारी गई.''
अस्पताल में छोड़कर फरार हुई पुलिस
बहन का सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि आरा के अस्पताल से पटना रेफर करने के बाद पुलिस ने घायल भरत को मुर्दों के बीच लिटा दिया और वहां से भाग गई. बहन ने बताया, ''जब मैं पटना पहुंची तो डॉक्टरों से पूछा कि भरत तिवारी कहां हैं? शुरू में किसी ने कुछ नहीं बताया. बाद में पता चला कि मेरे भाई को मुर्दों के पास रखकर पुलिस चली गई थी. इलाज तक नहीं कराया गया.''
उन्होंने आगे कहा कि जब परिवार की महिलाएं (मां और भाभी) पुलिस को रोकने की कोशिश की तो उन्हें भी भगा दिया गया. पुलिस ने शव को 10 मिनट तक छूने तक नहीं दिया और सीधे आरा ले गई. बहन ने साफ कहा कि पुलिसवालों को सिर्फ सस्पेंड करने से काम नहीं चलेगा. ''4-5 महीने बाद वे फिर ड्यूटी पर आ जाएंगे, लेकिन मेरा भाई वापस नहीं आएगा. इसलिए उन सबको फांसी दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसा न हो.''
यह मामला पहले से ही सुर्खियों में है. परिजनों का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था, जबकि पुलिस अपना पक्ष रख रही है. मामले की CBI जांच की मांग भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है और पूरे बिहार में इस घटना को लेकर आक्रोश फैला हुआ है.