आरा: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं. शाहपुर थाना के थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही एक दारोगा, एक एएसआई और कुछ सिपाहियों पर भी कार्रवाई की गई है.
परिजनों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का गंभीर आरोप लगाया है. मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी का कहना है कि उनके बेटे भरत ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे चार गोलियां मार दीं.
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार शाम भरत तिवारी ने पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तानते हुए फेसबुक लाइव किया था. वीडियो वायरल होने के बाद भी थानाध्यक्ष ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. बुधवार सुबह हुई मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत हो गई. आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ NH-922 को जाम कर दिया. उन्होंने मुआवजे, नौकरी और निष्पक्ष जांच की मांग की है.
पुलिस का बयान
पुलिस अधीक्षक राज ने बताया कि थानाध्यक्ष द्वारा स्थिति संभालने में लापरवाही बरती गई, इसलिए उन्हें तत्काल निलंबित किया गया. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और रिपोर्ट NHRC को भी भेजी जा रही है. यह मामला बिहार में पुलिस एनकाउंटरों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी.