चेन्नई: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद चर्च निर्माण को लेकर सनसनीखेज विवाद खड़ा हो गया है. मद्रास हाई कोर्ट ने कोयंबटूर के मरियम्मन मंदिर के पास प्रस्तावित चर्च के निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने साफ कहा कि बड़े स्तर पर चर्च बनाने के पीछे गलत नीयत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और वी. लक्ष्मीनारायण की डिवीजन बेंच ने कहा, ''कोयंबटूर सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर है. यहां पहले बम धमाके और खूनी दंगे हो चुके हैं. मंदिर के पास जहां ईसाई परिवार बहुत कम हैं, वहां बड़ा चर्च बनाने का प्रस्ताव गलत इरादों की ओर इशारा करता है.''
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि विजय (सी. जोसेफ विजय) के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य के कुछ हिस्सों में “हर गांव में चर्च बनाने” की मांग वाले पोस्टर लगे हैं. याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि नया चर्च धर्मांतरण गतिविधियों का केंद्र बन सकता है. याचिका कोयंबटूर के कलापट्टी इलाके में चर्च निर्माण का विरोध करने वाली एन. बालासुब्रमण्यम ने दायर की थी. निर्माण स्थल सार्वजनिक सड़क पर बताया गया, जो पुराने मंदिर के बेहद करीब है.
हिंदू समुदाय के जोरदार विरोध के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने पहले अनुमति दे दी थी, जिसे अब कोर्ट ने रोका है. कोर्ट ने धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष और बहुलवादी देश हैं. अगर कोई धार्मिक अधिकार सही है तो राज्य उसकी रक्षा करे, लेकिन यहां ऐसा कोई अधिकार नहीं दिखता.
याचिकाकर्ता ने उदयनिधि स्टालिन के “सनातन धर्म को खत्म करने” वाले बयान और नए स्पीकर द्वारा बाइबिल आयत पढ़ने का भी हवाला दिया. कोर्ट ने इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लिया. यह फैसला तमिलनाडु में धार्मिक संतुलन और मंदिर-चर्च विवाद को लेकर नई बहस छेड़ गया है. हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश यथास्थिति बरकरार रखने का है, जबकि मुख्य मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी.