नई दिल्ली: कोटा नगर निगम के मेयर चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली है. पार्टी की प्रत्याशी अनुसुईया गोस्वामी ने कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को हराकर मेयर का पद हासिल कर लिया. अनुसुईया को 65 वोट मिले, जबकि सुनीता सुमन को सिर्फ 35 वोट ही हासिल हो सके. यह परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. नगर निगम में भाजपा के 57 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 39.
फिर भी कांग्रेस प्रत्याशी को अपनी ताकत से कम वोट मिले. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की, जिसके चलते भाजपा उम्मीद से ज्यादा वोट हासिल करने में सफल रही. मेयर चुने जाने के बाद अनुसुईया गोस्वामी पदभार ग्रहण करने पहुंचीं. इस दौरान वह भावुक नजर आईं.
पदभार संभालने से पहले उन्होंने मेयर की टेबल को प्रणाम किया. नई मेयर के आने पर पुरानी कुर्सी हटाकर नई कुर्सी लगाई गई. वहीं जयपुर नगर निगम में भी मेयर चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने हंगामा किया. कांग्रेस विधायक रफीक खान को निगम परिसर के अंदर जाने से रोक दिया गया, जिसके बाद वे बाहर धरने पर बैठ गए. उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें किस आधार पर रोका गया और अंदर प्रवेश करने वालों की रिकॉर्डिंग निकाली जानी चाहिए.
कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने भी आरोप लगाया कि सुबह से भाजपा के लोग बूथ के अंदर-बाहर आ-जा रहे थे. पार्षद मुकेश छापोला ने दावा किया कि कांग्रेस पार्षदों को वोट डालने से रोका जा रहा था. राजस्थान के अन्य नगर निकायों में भी परिणाम आए.
सुकेत नगर पालिका में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा अध्यक्ष चुने गए, जबकि श्रीविजयनगर में कांग्रेस के सुशील मिढ़ा ने जीत दर्ज की. खाटूश्यामजी में हाईकोर्ट के आदेश के कारण मतगणना स्थगित कर दी गई. 21 सितंबर को राज्य के 303 नगरीय निकायों में चुनाव हुए थे. अब परिणाम और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया जारी है. कोटा और जयपुर के ये घटनाक्रम राजस्थान की नगर निकाय राजनीति में हलचल पैदा कर रहे हैं.