पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। कभी राज्य की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत मानी जाने वाली TMC अब कानूनी विवाद, पार्टी के भीतर मतभेद और प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर चर्चा में है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा ममता बनर्जी के उस पुराने बयान की हो रही है, जो उन्होंने साल 2025 में ईद के मौके पर दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद के बताए रास्ते वाले धर्म को मानती हैं, लेकिन “गंदे धर्म” की राजनीति को स्वीकार नहीं करतीं। इस बयान को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है।
सिलीगुड़ी साइबर थाने में ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत वकील रिंकी चटर्जी सिंह की ओर से दी गई है। आरोप लगाया गया है कि बयान से सनातन धर्म और हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि पहले भी TMC नेताओं की ओर से हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयान दिए जाते रहे हैं।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें धार्मिक समूहों के बीच नफरत फैलाने, शांति भंग करने और आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस बयान को लेकर पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आने लगे हैं। TMC नेता अत्री शर्मा ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि पार्टी के कई नेता इस बयान से सहमत नहीं थे और शिकायत होना स्वाभाविक है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के अंदर असहजता बढ़ रही है।
इधर कानूनी विवाद बढ़े तो दूसरी तरफ पार्टी में टूट की चर्चाएं भी तेज हो गईं। हाल ही में विधायक रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा विधानसभा में स्पीकर रथींद्र बोस से मिलने पहुंचे, जहां विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। दोनों नेताओं की बातचीत और सहज माहौल ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
राजनीतिक विश्लेषक अब बंगाल की स्थिति की तुलना महाराष्ट्र की शिवसेना टूट से करने लगे हैं। चर्चा यह भी है कि अगर असंतोष बढ़ा तो TMC के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि संबंधित नेताओं ने इसे सामान्य मुलाकात बताया है।
इसी बीच राज्य में प्रशासनिक कार्रवाई भी तेज हो गई है। नगर निगम ने हाल ही में TMC से जुड़े एक कार्यालय के क्लॉक टावर को अवैध निर्माण बताते हुए गिरा दिया। लंबे समय से इसकी शिकायतें की जा रही थीं। सत्ता बदलने के बाद ऐसे एक्शन को विपक्ष और प्रशासनिक सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है।
उधर अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों में भी जांच एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लगातार यह चर्चा चल रही है कि आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।