बांग्लादेश में भारत का बड़ा दांव! दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति और सीमा सुरक्षा पर तेज हुआ एक्शन

Global Bharat 27 May 2026 10:00: PM 2 Mins
बांग्लादेश में भारत का बड़ा दांव! दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति और सीमा सुरक्षा पर तेज हुआ एक्शन

भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। पूर्व रेल मंत्री और वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। खास बात यह है कि वह इंडियन फॉरेन सर्विस के अधिकारी नहीं हैं, फिर भी उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। नियुक्ति के बाद उनकी मुलाकात सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी से हुई, जिसके बाद राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि भारत को खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिले हैं कि पाकिस्तान की ISI बांग्लादेश में भारत विरोधी तत्वों को ट्रेनिंग दे रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनका मकसद भारत में घुसपैठ और अस्थिरता फैलाना हो सकता है। इसी को देखते हुए सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

सरकार ने पश्चिम बंगाल में संदिग्ध घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर यानी डिटेंशन सेंटर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सीमा पर फेंसिंग के लिए BSF को जमीन आवंटित की गई है और जहां जरूरत होगी वहां नई चौकियां और सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके अलावा पकड़े गए संदिग्धों को लंबी कानूनी प्रक्रिया में डालने की बजाय सीधे BSF को सौंपने की रणनीति पर भी काम हो रहा है।

जानकारों का कहना है कि यह पूरा कदम सिर्फ सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए भारत की नई रणनीति का हिस्सा है। शेख हसीना को भारत में शरण मिलने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। वहीं बांग्लादेश की राजनीति में कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव को लेकर भी भारत सतर्क नजर आ रहा है।

दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कार्यशैली को करीब से समझने वाले त्रिवेदी कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे। उन्होंने वामपंथी दौर से लेकर TMC के उदय तक की राजनीति देखी है। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को सिर्फ राजनयिक फैसला नहीं बल्कि रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर भविष्य में घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज या सीमा पार नेटवर्क को लेकर कोई बड़ा खुलासा होता है तो उसका असर सीधे बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है। इस बीच बंगाल में विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि पहले राज्य में घुसपैठियों को संरक्षण दिया जाता था और उन्हें पहचान पत्र तक उपलब्ध कराए जाते थे।

भारत फिलहाल कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ सुरक्षा एजेंसियां सीमा पर निगरानी बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश के साथ संवाद भी जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में भारत-बांग्लादेश संबंध और सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

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