बांग्लादेशियों पर मेहरबान हुई ममता, PM मोदी की भविष्यवाणी हो रही सच

Global Bharat 21 Jul 2024 09:39: PM 2 Mins
बांग्लादेशियों पर मेहरबान हुई ममता, PM मोदी की भविष्यवाणी हो रही सच

अभिषेक शांडिल्य

भारत में बांग्लादेशी लाखों की संख्या में आएंगे तो उनका स्वागत ममता बनर्जी की सरकार फूल लेकर करेगी. ये कैसा कानून है जो भारत की ताकत को ही खण्ड खण्ड में बांट देगा? ये कैसी सियासत है जिसमें भारत के कानून का ही बंटवारा हो जाएगा? ममता बनर्जी का नया आदेश है जो भी बांग्लादेशी भारत आना चाहता है उसका स्वागत है, लेकिन वो स्वागत कैसा ये सुनकर आप के होश उड़ जाएंगे?

योगी कहते हैं नाम लिखना होगा तो इसपर एक पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाता है, लेकिन जब ममता बांग्लादेशियों को भारत का दामाद बनाना चाहती हैं तो फिर सुप्रीम कोर्ट कहां है? भारतीय बनकर बड़ी तादाद में बांग्लादेशी घुसपैठिए जालंधर और लुधियाना में भी बस चुके हैं.

असम, महाराष्ट्र, दिल्ली, ओडिशा, मध्यप्रदेश और भारत के सभी राज्यों में बांग्लादेशी वेश बदलकर देश को दीमक की तरह चाट रहे हैं. हमारी सारी सरकारी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा के फायदे उठा रहे हैं. हमारे लोगों की नौकरियां और उनके धंधे चौपट कर रहे हैं. कुछ सड़क किनारे भिखारी बने बैठे हैं. यह सब कांग्रेस, जनता दल और मार्क्सवादी दलों की सांठगांठ के साथ हो रहा है.

सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर जोगिंदर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि देश में लगभग 5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर बैठे हुए हैं, जबकि खुद बांग्लादेश के 2001 की जनगणना में एक करोड़ लोग गायब हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक जब सरकार ने बांग्लादेश की सीमा पर आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी तो पता चला लगभग 5000 लोग रोजाना बांग्लादेश से भारत आते हैं. महीने के 1.5 लाख. इतने सालों में कितने घुसपैठ कर गए पता नहीं, लेकिन इनकी संख्या 3 करोड़ से कम नहीं है. जोकि पंजाब की जनसंख्या से ज्यादा है, यानि पंजाब से बड़ी भूमि पर ये कब्जा जमाए बैठे हैं.

इसके बाद भी बांग्लादेश की जनता का स्वागत का सवाल भारत में घूम रहा है, वो कैसे आया ये भी समझना है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के पीछे बांग्लादेशी नागरिकों का भारी योगदान है. मोदी सरकार को भी ये बात पता है, पिछले कार्यकाल में ही मोदी सरकार के गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक खुलासा किया था.

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के जवाब में कहा था, पिछले तीन साल में ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों की संख्या भारत में तक़रीबन 1 लाख 10 हज़ार है. ये ऐसे बांग्लादेशी हैं जो आए तो थे भारत में वीज़ा लेकर, लेकिन वीज़ा की तारीख़ निकल जाने के बाद भी भारत में अवैध तरीक़े से रह रहे थे.

साल 2017, 2018, 2019, का ये आंकड़ा देखिए. ये मोदी सरकार का ही जारी डाटा है, जिसमें बंगाल का नंबर सबसे ज्यादा है, बंगाल के रास्ते ही लोग असम में जाते हैं, जिसका मुद्दा बार-बार हिमंता उठाते हैं. बीते कुछ समय से झारखंड के आदिवासी इलाकों की डेमोग्राफी में बदलाव की बात सुनाई दे रही है.

पाकुड़ में मुस्लिम आबादी में करीब 40 प्रतिशत की बढ़त हुई. वहीं संथाल आबादी 20 प्रतिशत से भी कम बढ़ी. साहिबगंज को देखें, तो संथालों के 11 प्रतिशत की तुलना में मुस्लिम आबादी में 37 प्रतिशत की बढ़त हुई. साल 2001 और 2011 की जनगणना की तुलना करने पर ये बात दिखती है.

इसकी वजह बांग्लादेशी घुसपैठ मानी जा रही है. कहा जाता है कि पश्चिम बंगाल का एक खास रूट लेते हुए बाहरी मुस्लिम झारखंड के बॉर्डर तक पहुंचते हैं. वहां कुछ दिन मदरसों में गुजारते हैं. इसके बाद आम लोगों के बीच घुलमिल जाते हैं.इसके बावजूद ममता की मनमनी पर सब चुप क्यों हैं? क्या देश बांटने और बेचने की साज़िश की जा रही है?

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