पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और पत्र लिखा, जिसमें दावा किया गया कि उन्हें अपने पिछले पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है, जिसमें उन्होंने रेप के मामलों से निपटने के लिए और अधिक सख्त कानून बनाने की मांग की थी. पत्र में ममता ने कहा कि हालांकि उन्हें महिला और बाल विकास मंत्री से जवाब मिला है, लेकिन यह उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को पर्याप्त रूप से संबोधित करने में विफल रहा.
ममता बनर्जी ने पत्र में लिखा है कि कृपया मेरे पत्र संख्या 44-CM दिनांक 22 अगस्त, 2024 (प्रतिलिपि संलग्न) को याद करें, जिसमें रेप की घटनाओं पर कठोर केंद्रीय कानून बनाने और ऐसे अपराधों के अपराधियों को अनुकरणीय दंड देने की आवश्यकता के बारे में बताया गया है. इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर आपकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. हालांकि, भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्री से एक उत्तर प्राप्त हुआ है, जो मेरे पत्र में उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को दर्शाने में असफल है. उन्होंने कहा कि मेरा विचार है कि इस सामान्य उत्तर को भेजते समय विषय की गंभीरता और समाज के लिए इसकी प्रासंगिकता को पर्याप्त रूप से नहीं समझा गया है.
मुख्यमंत्री का यह पत्र एक प्रशिक्षु डॉक्टर के रेप-हत्या मामले और उसके बाद आरजी कर अस्पताल में हुई बर्बरता के बाद उनकी सरकार की कड़ी आलोचना के बीच आया है. अपने पत्र में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के द्वारा की गई पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिसके बारे में उनका मानना है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री से प्राप्त उत्तर में इसे नजरअंदाज कर दिया गया है.
पत्र में कहा गया है कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) के संबंध में, राज्य सरकार द्वारा 10 विशेष पोक्सो कोर्ट को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा, पूरे राज्य में 88 एफटीएससी और 62 पोक्सो नामित कोर्ट काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को ही एफटीएससी में पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय ने देखा है कि मामलों की गंभीरता को देखते हुए, स्थायी न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त करने की आवश्यकता है. इसके लिए भारत सरकार के स्तर पर जांच और उसके बाद उचित कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसके लिए आपका हस्तक्षेप आवश्यक होगा.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के लिए एक सख्त केंद्रीय कानून और अनुकरणीय दंड पर विचार करने का भी आग्रह किया, जिसमें ट्रायल अधिकारियों द्वारा एक निश्चित समय सीमा के भीतर मामलों का निपटान करने का अनिवार्य प्रावधान हो. ममता बनर्जी ने पहले घोषणा की थी कि उनकी सरकार कोलकाता डॉक्टर रेप और हत्या मामले में अपराधी के लिए मृत्युदंड की मांग करेगी.