मेरठ: अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक पर तिरंगा लहराने वाली मेरठ की बेटी रूपल चौधरी ने अब देश सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत की है। 400 मीटर की स्टार धाविका रूपल भारतीय सेना में नायब सूबेदार बन गई हैं। बंगलूरू में कड़े सैन्य प्रशिक्षण के बाद पासिंग आउट परेड पूरी कर जैसे ही रूपल बुधवार को अपने पैतृक गांव शाहपुर जैनपुर पहुंचीं, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
ट्रेनिंग पूरी कर औपचारिक रूप से संभाली जिम्मेदारी
रूपल के पिता ओमवीर सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष रूपल का चयन भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर हुआ था। कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद मंगलवार को बंगलूरू में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड में उन्होंने हिस्सा लिया और औपचारिक रूप से सैन्य सेवा की कमान संभाली। वर्दी पहनकर गांव लौटने पर पूरे इलाके में जश्न का माहौल है।
चोट से जूझीं, पर नहीं मानी हार: ट्रैक पर शानदार वापसी
रूपल का यह सफर आसान नहीं रहा। पिछले कुछ समय से वह गंभीर चोट से जूझ रही थीं, जिसके चलते वह कई प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स से बाहर रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हाल ही में 2 सितंबर को मेरठ में आयोजित इंडियन एथलेटिक्स सीरीज में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान हासिल कर शानदार वापसी दर्ज की।
रूपल का कहना है कि भारतीय सेना की वर्दी पहनना उनके लिए गौरव का क्षण है। सेना की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उनका पूरा फोकस आने वाली अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं और ट्रैक पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर रहेगा।
विश्व पटल पर रचा था इतिहास
रूपल चौधरी के नाम एथलेटिक्स जगत का ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। साल 2022 में आयोजित विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 4x400 मीटर रिले में रजत और 400 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। वह एक ही विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं।