37 साल तक मर्द बनकर जिया एक मां! मुथू मास्टर की कहानी रुला देगी, बेटी की सुरक्षा के लिए बदली अपनी पहचान

Amanat Ansari 17 Sep 2026 03:00 PM 1 Mins
37 साल तक मर्द बनकर जिया एक मां! मुथू मास्टर की कहानी रुला देगी, बेटी की सुरक्षा के लिए बदली अपनी पहचान

तूथुकुडी (तमिलनाडु): तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में 37 साल तक लोग एक शख्स को ‘मुथू मास्टर’ या ‘अन्नाची’ (बड़े भाई) कहकर पुकारते रहे. सफेद कमीज, धोती, सिर पर साफा और होंठों में बीड़ी दबाए खेतों में काम करने वाले इस शख्स के बारे में किसी को अंदाजा तक नहीं था कि असल में वह एक महिला हैं. मुथू मास्टर का असली नाम पेचियम्माल है. उन्होंने अपनी और बेटी की हिफाजत के लिए अपनी पहचान की बलि दे दी.

शादी के 15 दिन टूटा सुहाग

20 साल की उम्र में पेचियम्माल की शादी हुई. शादी के महज 15 दिन बाद पति का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. कुछ दिनों बाद पता चला कि वह गर्भवती हैं. उन्होंने बेटी को जन्म दिया और पेट पालने के लिए तूथुकुडी की कोयला फैक्ट्री में काम करने लगीं. एक शाम काम पर जाते समय ट्रक ड्राइवर ने उनके साथ जबरदस्ती की कोशिश की. वह किसी तरह बच निकलीं, लेकिन उस रात खौफ के मारे सो नहीं सकीं. उन्हें समझ आ गया कि अकेली विधवा औरत के लिए समाज में सुरक्षित रहना लगभग नामुमकिन है.

कैसे बनीं मुथू मास्टर?

अगले दिन पेचियम्माल बाजार गईं, पुरुषों के कपड़े खरीदे और तिरुचेंदुर मंदिर पहुंचीं. वहां सिर मुंडवाया, महिला रूप में आखिरी बार भगवान के दर्शन किए और बाहर निकलते ही ‘पेचियम्माल’ से ‘मुथू’ बन गईं. उन्होंने पुरुषों जैसा हाव-भाव सीखा, यहां तक कि बीड़ी पीना भी. एक बार देर रात एक शराबी ने उन्हें घेर लिया, लेकिन बीड़ी सुलगाते ही उसने ‘भाई’ कहकर माचिस मांग ली. हर महीने पीरियड के दर्द को छिपाना सबसे कठिन था. वह दर्द निवारक गोलियां खातीं और ज्यादा काम करतीं ताकि किसी को शक न हो.

बेटी को कब पता चला?

मुथू चेन्नई चले गए और फिर एक गांव में बस गए. बेटी शनमुगसुंदरी को 10 साल की उम्र तक लगता रहा कि उनकी मौसी ही मां हैं. 7 साल की उम्र में उन्हें पता चला कि मुथू मास्टर ही उनकी मां हैं. यह राज परिवार के करीबी लोगों तक ही सीमित रहा. आज शनमुगसुंदरी शादीशुदा हैं और पास के गांव में किराने की दुकान चलाती हैं. पेचियम्माल कहती हैं, “अगर उस रात मेरे साथ कुछ गलत हो जाता, तो क्या समाज मुझे दोष दिए बिना न्याय देता? यह पहचान मेरी ताकत बनी. इसने मुझे बेटी पालने का हौसला और सम्मान दिया. अब मैं आखिरी सांस तक मुथू बनकर ही जीना चाहती हूं.”

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