भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद को लेकर एक बड़ी जांच रिपोर्ट सामने आई है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक्सप्रेस इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि उज्जैन में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नई सड़कों, हाईवे अपग्रेड और मास्टर प्लान के तहत भूमि उपयोग (Land Use) परिवर्तन के बीच मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने वर्ष 2021 से अब तक करीब 253 एकड़ जमीन खरीदी है.
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के बाद दिसंबर 2023 से 2025 के बीच परिवार ने 137 प्लॉट खरीदकर लगभग 168 एकड़ जमीन अपने नाम की. इन खरीदों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए. जमीन खरीदने वालों में मुख्यमंत्री की पत्नी, पुत्रवधू, भाई, भाभी, भतीजे और चचेरे भाई शामिल बताए गए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि खरीदी गई अधिकांश जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां नई सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित या घोषित की गई हैं, अथवा जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान-2035 में कृषि भूमि से आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदले जाने की योजना है. रिपोर्ट के मुताबिक 168 एकड़ में से करीब 111 एकड़ जमीन ऐसी परियोजनाओं के आसपास स्थित है, जिनकी घोषणा मुख्यमंत्री बनने के बाद हुई.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मोहन यादव लंबे समय से उज्जैन के विकास और पर्यटन परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं. वे 2004 से 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) के अध्यक्ष रहे, 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रमुख रहे और 2013 से उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक हैं.
हालांकि, राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आरोपों को मुख्यमंत्री से जोड़ने को अनुचित बताया है. उनका कहना है कि यादव परिवार कई वर्षों से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है और जमीन खरीद को विकास योजनाओं से जोड़कर देखना गलत होगा.
रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है और संभावित हितों के टकराव की जांच की मांग उठाई है. वहीं, भाजपा की ओर से अब तक किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया गया है.