लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर पर दिए गए बयान को लेकर राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी द्वारा मौलाना जौहर को भारत विभाजन का जिम्मेदार ठहराना इतिहास के प्रति उनके 'अल्पज्ञान' और स्वतंत्रता सेनानी के योगदान को राजनीतिक चश्मे से देखने का उदाहरण है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट साझा करते हुए ऐतिहासिक कालक्रम का ब्योरा दिया। उन्होंने लिखा कि इतिहास का यह स्पष्ट तथ्य है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर का निधन 4 जनवरी 1931 को लंदन में हो गया था। उनके निधन के दो साल बाद, यानी 1933 में पहली बार 'पाकिस्तान' नाम से अलग राष्ट्र का प्रस्ताव (चौधरी रहमत अली द्वारा) सामने आया था।
नगीना सांसद ने सवाल किया कि जो शख्स 1931 में दुनिया छोड़ चुका था, उसे 1933 के प्रस्ताव और 1947 में हुए देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराना ऐतिहासिक तथ्यों, कालक्रम और उनके वास्तविक योगदान की घोर अनदेखी है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, "जानकारी का टोटा, बयानों की भरमार!"
मौलाना मोहम्मद अली जौहर के योगदान को याद करते हुए सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोहा लेने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार, शिक्षाविद और सच्चे राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मुखर आवाज उठाई, जेल की यातनाएं सहीं और महात्मा गांधी के साथ मिलकर खिलाफत व असहयोग आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई।
चंद्रशेखर ने आगे याद दिलाया कि 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन (First Round Table Conference) में मौलाना जौहर ने भारत की पूर्ण आजादी और स्वशासन की मांग पूरी मजबूती से रखी थी। उन्होंने अंग्रेजों के सामने ऐलान किया था कि वे 'गुलाम भारत' में वापस नहीं लौटेंगे और आजादी के लिए लड़ते हुए वहीं उनका निधन हो गया।
आज़ाद ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक संकीर्णता से नहीं, बल्कि प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर पढ़ा और समझा जाना चाहिए।