लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों तेज़ हलचल मची हुई है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले. पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी का रुख कर सकते हैं. सूत्रों की मानें तो 15 फरवरी को वे औपचारिक तौर पर सपा में शामिल हो सकते हैं, और इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद उन्हें सदस्यता दिला सकते हैं.
यह खबर कांग्रेस के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि सिद्दीकी ने महज़ 24 जनवरी को ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था. इस्तीफे के बाद उन्होंने कुछ दिनों में अपने अगले राजनीतिक फैसले का ऐलान करने की बात कही थी और अब लगता है कि उनका फैसला सपा के पक्ष में जा रहा है.
खास बात यह है कि सिद्दीकी अकेले नहीं आ रहे. उनके साथ कई करीबी नेता, पूर्व विधायक और उनके समर्थक भी सपा में शामिल होने वाले हैं. कुछ रिपोर्ट्स में अनुमान है कि हजारों लोग उनके साथ पार्टी जॉइन कर सकते हैं. इसके अलावा, फूल बाबू जैसे अन्य प्रमुख चेहरे भी इस काफिले में शामिल हो सकते हैं.
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उन्होंने 1991 में बसपा के टिकट पर बांदा सदर से विधायक बनकर इतिहास रचा. जिले के पहले मुस्लिम विधायक बने. मायावती सरकार में वे लंबे समय तक कैबिनेट मंत्री रहे और पार्टी में मायावती के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शुमार थे.
बाद में बसपा छोड़कर कांग्रेस में गए, जहां करीब 8 साल रहे. अब सपा में उनका आगमन पार्टी की मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. एक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि उनके छोटे भाई हसनुद्दीन सिद्दीकी पहले से ही सपा में राष्ट्रीय सचिव हैं. दोनों भाइयों के बीच पुराने मतभेदों के बावजूद अब एक ही पार्टी में आने से अंदरूनी चर्चाएं तेज़ हो गई हैं.
अभी तक सपा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि 15 फरवरी को यह बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. यह कदम यूपी की राजनीति में नई समीकरण बनाने वाला साबित हो सकता है.