Ajit Pawar plane crash: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और NCP नेता अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती के पास चार्टर्ड प्लेन क्रैश में हुई दुखद मौत के बाद अब राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. उनके भतीजे रोहित पवार ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हादसे को महज दुर्घटना नहीं, बल्कि संभावित साजिश बताते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए थे. अब अजित पवार की अगुवाई वाली NCP ने पहली बार इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है.
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे ने ठाणे में मीडिया से बातचीत में कहा कि रोहित पवार द्वारा उठाए गए ज्यादातर मुद्दों की पूरी जांच होनी चाहिए. इसमें टाइम बॉम्ब का एंगल, पायलट सुमित कपूर की भूमिका, मेंटेनेंस से जुड़े पहलू, आखिरी समय में कप्तान बदलने की बात और VSR कंपनी, ARROW हैंडलर जैसे तत्वों पर भी गहन जांच की जरूरत है. परांजपे ने जोर देकर कहा कि यह साजिश थी या दुर्घटना, जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा और पार्टी पहले दिन से ही जांच की मांग कर रही है.
हालांकि, पार्टी ने 27 जनवरी की रात से जुड़ी कुछ बातों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया है. परांजपे ने स्पष्ट किया कि पार्टी 27 जनवरी की घटनाओं (जैसे फाइल विवाद, देर रात जगाए जाने या कार से आने के प्लान में बदलाव) को स्वीकार नहीं करती और इन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. वे केवल 28 जनवरी की दुर्घटना और इससे जुड़े तकनीकी/सुरक्षा पहलुओं की जांच पर जोर दे रहे हैं.
'परिवार' का मतलब सिर्फ खून का रिश्ता नहीं'
आनंद परांजपे ने भावुक होकर कहा कि परिवार का अर्थ केवल रक्त संबंध तक सीमित नहीं है. 2 जुलाई 2023 के राजनीतिक फैसले के बाद अजित दादा के साथ खड़े सभी सहयोगी और नेता भी उनका परिवार हैं. उन्होंने रोहित पवार के बयानों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे आरोप दादा के परिवार को गहरी चोट पहुंचा रहे हैं. महाराष्ट्र की संस्कृति में ऐसे दुख के समय राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए था.
परांजपे ने यह भी याद दिलाया कि अंतिम संस्कार से पहले ही विलय (मर्जर) की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिस पर पार्टी ने पहले ही सुनील तटकरे के माध्यम से स्पष्ट रुख रखा था. कुल मिलाकर, NCP ने रोहित पवार के अधिकांश सवालों पर जांच का समर्थन किया है, लेकिन घटना को पूरी तरह राजनीतिक साजिश के रूप में पेश करने से इनकार किया है. पार्टी का कहना है कि जांच को बिना किसी राजनीतिक दबाव के आगे बढ़ने दिया जाए और उसके नतीजों का इंतजार किया जाए. यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नए मोड़ ला सकता है, जहां परिवार और पार्टी के बीच तनाव साफ दिख रहा है.