ऑपरेशन सिंदूर जारी है: नेवी चीफ ने कहा कि बिना किसी सूचना के संघर्ष शुरू हो सकता है

Amanat Ansari 30 Nov 2025 06:46: PM 2 Mins
ऑपरेशन सिंदूर जारी है: नेवी चीफ ने कहा कि बिना किसी सूचना के संघर्ष शुरू हो सकता है

नई दिल्ली: नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने रविवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और परिचालन विवरण पर चर्चा करना उचित नहीं है. उन्होंने बताया कि इस मिशन के दौरान थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच वायु रक्षा समन्वय पूरी तरह एकीकृत था. पुणे में एडमिरल जे.जी. नाडकर्णी स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय नौसेना ने जिस तेजी से तैनाती की, हथियारों का प्रयोग किया और आक्रामक युद्धाभ्यास किया, उससे नौसेना की निरंतर तैयार रहने की क्षमता सामने आई.

नौसेना की मुद्रा इतनी मजबूत थी कि पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों तक ही सीमित रह गई. अप्रैल में पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत के बाद मई में शुरू किया गया यह ऑपरेशन समुद्र में भारत की अत्यधिक शक्ति प्रदर्शन की क्षमता का प्रमाण है, ऐसा उन्होंने जोड़ा.

एडमिरल त्रिपाठी ने वर्तमान सुरक्षा परिवेश को ऐसा बताया जिसमें बिना किसी पूर्व सूचना के संघर्ष भड़क सकता है, इसलिए चौबीसों घंटे तैयार रहना आवश्यक है. गैर-राजकीय तत्व अब वे हथियार और रणनीतियाँ अपना रहे हैं जो पहले केवल राज्य रखते थे. इसलिए समुद्र में जाने वाली हर नौसेना इकाई को लड़ाकू हथियारों से लैस रहना होगा और साथ ही पुलिसिया (कांस्टेबुलरी) भूमिकाओं के लिए भी तैयार रहना होगा.

उन्होंने जोर देकर कहा कि नौसेना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार सक्रिय है, समुद्री लेन की रक्षा कर रही है और जहाज़ की झंडी या चालक दल की राष्ट्रीयता चाहे जो हो, समुद्री डकैती से लेकर आपात स्थितियों तक हर घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया दे रही है. भारत इन उथल-पुथल भरे वैश्विक जलों में एक स्थिर प्रकाश-स्तंभ की तरह काम कर सकता है.

मिशन-आधारित निरंतर तैनाती की बात करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले साल नौसेना ने लगभग 11,000 जहाज़-दिन समुद्र में बिताए, जिनमें 2008 से अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती-विरोधी निरंतर मौजूदगी भी शामिल है.इसी तैयारियों के कारण उच्च जोखिम वाली स्थितियों में तुरंत कार्रवाई संभव हुई.

  • आईएसएस विशाखापत्तनम ने जलते जहाज़ एमवी मार्लिन लुआंडा को आग बुझाने में मदद की
  • आईएसएस तेग ने डूबते प्रेस्टीज फाल्कन से 9 चालक दल के सदस्यों को बचाया
  • इन कार्रवाइयों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने लगातार दो साल तक भारत को प्रशंसा-पत्र दिए.

एडमिरल त्रिपाठी ने भारत के बढ़ते समुद्री फोकस पर प्रकाश डाला और मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030, मैरिटाइम अमृत काल 2047, संशोधित समुद्री कानूनों तथा इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश का ज़िक्र किया. ये प्रयास भारत के समुद्री पुनर्जागरण और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विज़न की दिशा में यात्रा को दर्शाते हैं. क्षेत्रीय गतिशीलता पर उन्होंने कहा कि वे बांग्लादेश को मित्र के अलावा कुछ नहीं कहेंगे, वर्तमान तनाव को अस्थायी बताया और आगामी चुनावों के बाद द्विपक्षीय संबंधों के फिर से मजबूत होने की आशा व्यक्त की.

तकनीकी चुनौतियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जलमग्न क्षेत्र आज भी वैश्विक शक्तियों के लिए जटिल बना हुआ है और नई तकनीकें तथा अंडरवॉटर ड्रोन्स तेजी से उभर रहे हैं. बिना चालक वाले और स्वचालित जहाज़ों का बाजार बढ़ रहा है, युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका बढ़ रही है और निर्णय अब मशीन की गति से लिए जा रहे हैं. उपग्रहों, ड्रोन्स और एआई विश्लेषण से समुद्र में पारदर्शिता बढ़ रही है, साथ ही सस्ते ड्रोन्स और हाइपरसोनिक हथियारों का प्रसार हो रहा है ये सब मिलकर समुद्री संघर्ष की प्रकृति बदल रहे हैं.

इस बदलते परिदृश्य में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना को भू-राजनीतिक बदलावों, तकनीकी व्यवधानों और नई सामरिक वास्तविकताओं के अनुकूल लगातार स्वयं को ढालते रहना होगा.

Operation Sindoor Navy Chief Dinesh K Tripathi Conflicts warning

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