पटना के जिस हॉस्टल में हुई नीट छात्रा की संदिग्ध मौत, वहां के मालिक पर पढ़िए 3 बड़े खुलासे

Amanat Ansari 18 Jan 2026 07:15: PM 2 Mins
पटना के जिस हॉस्टल में हुई नीट छात्रा की संदिग्ध मौत, वहां के मालिक पर पढ़िए 3 बड़े खुलासे

नई दिल्ली: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद जिले की एक युवा छात्रा के साथ हुई क्रूर घटना ने पूरे बिहार में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है. छात्रा 6 जनवरी को अपने कमरे में बेहोश मिली थी, जिसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या या दवा के ओवरडोज का मामला बताकर दुष्कर्म के आरोपों को खारिज किया था. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी. रिपोर्ट में यौन हिंसा (सेक्सुअल असॉल्ट) की संभावना से इनकार नहीं किया गया, शरीर पर गहरे चोट के निशान, नाखूनों के खरोंचे और संघर्ष के अन्य संकेत मिले.

इस खुलासे के बाद जांच अब हॉस्टल पर पूरी तरह केंद्रित हो गई है. इस हॉस्टल की बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन (जिन्हें मनीष चंद्रवंशी या मनीष रंजन के नाम से भी जाना जाता है) को पुलिस ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के चलते गिरफ्तार कर लिया है. वे जहानाबाद जिले के मखदुमपुर क्षेत्र के मूल निवासी हैं.

मनीष की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प है. साल 2020 में वे पटना आया था और एक प्राइवेट अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया, जहां उसे 15,000 रुपए था मासिक वेतन प्राप्त होता था.. उस समय उनके पास कोई खास संपत्ति नहीं थी और परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता था. लेकिन महज कुछ सालों में स्थिति पूरी तरह बदल गई. आज उसके पास पटना में करोड़ों की कीमत वाली बिल्डिंग है, जिसमें यही शंभू गर्ल्स हॉस्टल चल रहा है. जहानाबाद में भी उसके नाम पर जमीन-जायदाद दर्ज है.

कोविड काल में कालाबाजारी?

जांच में सामने आया है कि COVID-19 महामारी के दौरान, जब ऑक्सीजन सिलेंडरों की भारी किल्लत थी, मनीष ने एक ऑक्सीजन एजेंसी शुरू की. यही उनका पहला बड़ा कारोबार माना जा रहा है. अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि क्या यह एजेंसी सरकारी सप्लाई या टेंडर से जुड़ी थी? प्राइवेट अस्पतालों को कितने सिलेंडर सप्लाई किए गए, पेमेंट कैसे और किन अकाउंट्स में आया, लाइसेंस-परमिट सबकी जांच हो रही है.

विवादित जमीन पर है होस्टल?

मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इसी बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर रहते हैं. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या उन्हें हॉस्टल में आने-जाने वालों की जानकारी थी, खासकर घटना वाली रात को क्या हुआ. इसके अलावा, हॉस्टल की बिल्डिंग विवादित जमीन पर बनी होने के संकेत मिले हैं, इसलिए जमीन के कागजात, रजिस्ट्री और मालिकाना हक की भी जांच चल रही है.

2 वोटर कार्ड का खुला राज

पुलिस को मनीष के नाम पर दो अलग-अलग वोटर आईडी (EPIC) कार्ड भी मिले हैं. एक जहानाबाद का और दूसरा पटना के कुम्हरार क्षेत्र का. यह गंभीर कानूनी उल्लंघन है. पहले चार दिनों तक पुलिस के आत्महत्या वाले बयान और परिवार के विरोध पर लाठीचार्ज के बाद आक्रोश बढ़ा. पोस्टमार्टम के बाद ही पुलिस ने यौन हिंसा और हत्या की दिशा में जांच शुरू की.

अब एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित हो चुकी है और जांच पटना से जहानाबाद तक फैली हुई है. यह मामला अब महिला सुरक्षा, हॉस्टल नियमों और पुलिस की शुरुआती जांच पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है. जांच अभी जारी है और आगे क्या खुलासे होते हैं, यह देखना बाकी है.

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