Kailash Mansarovar Pilgrimage: भारत ने नेपाल की लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति को खारिज करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर उसकी स्थिति स्पष्ट और सुसंगत बनी हुई है और काठमांडू के क्षेत्रीय दावों को अस्वीकार किया है. विदेश मंत्रालय ने 3 मई को कहा कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है. यह कोई नई बात नहीं है. नेपाल के दावों पर भारत ने कहा कि ऐसे दावे न तो उचित हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों व प्रमाणों पर आधारित हैं.
सरकार की तरफ से कहा गया कि क्षेत्रीय दावों का इस तरह एकतरफा और कृत्रिम विस्तार असमर्थनीय है. नई दिल्ली ने बातचीत के लिए अपनी तैयारियों का भी संकेत दिया और कहा कि वह सीमा संबंधी लंबित मुद्दों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से हल करने सहित रचनात्मक बातचीत के लिए खुला है.
नेपाल ने भारत और चीन को भेजा विरोध पत्र
यह प्रतिक्रिया नेपाल द्वारा लिपुलेख मार्ग से प्रस्तावित यात्रा पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने के बाद आई है. नेपाल ने भारत और चीन दोनों को राजनयिक विरोध पत्र (डेमार्श) भेजा है. काठमांडू ने कहा कि यह विवादित क्षेत्र से संबंधित है और उसने इस क्षेत्र पर अपना लंबे समय से चला आ रहा दावा दोहराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1816 के सुगौली संधि के अनुसार लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के अभिन्न अंग हैं, इस पर नेपाल सरकार स्पष्ट और दृढ़ है.
औपचारिक नोट और राजनीतिक परामर्श
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल क्षेत्री ने कहा कि नेपाल ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से नई दिल्ली और बीजिंग दोनों को अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं. विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि यह फैसला राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद लिया गया है और नेपाल की आधिकारिक स्थिति अब औपचारिक रूप से दोनों देशों को सूचित कर दी गई है. काठमांडू ने यह भी पुष्टि की कि चीन को सूचित कर दिया गया है कि लिपुलेख क्षेत्र नेपाल के क्षेत्र में आता है.
विवादित क्षेत्र में गतिविधियां रोकने की अपील
नेपाल ने भारत से आग्रह किया है कि वह विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण, विस्तार, सीमा व्यापार या यात्रा से संबंधित कोई भी गतिविधियां न करे. सरकार ने कहा कि उसने इन चिंताओं को पहले भी कई बार उठाया है और इसे संवेदनशील मुद्दा बताया है.
दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अडिग रहने के बावजूद, नेपाल ने कहा कि वह सीमा विवाद को संवाद के माध्यम से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय ने कहा कि नेपाल-भारत के निकट और मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना के अनुरूप, नेपाल ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमाणों और कूटनीतिक संवाद के माध्यम से सीमा मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है.
लंबे समय से चला आ रहा विवाद फिर सुर्खियों में
लिपुलेख-कालापानी-लिम्पियाधुरा क्षेत्र वर्षों से भारत और नेपाल के बीच विवाद का विषय रहा है. इस नवीनतम आदान-प्रदान ने विवाद को एक बार फिर तीखा केंद्र में ला दिया है, हालांकि दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि बातचीत ही आगे का रास्ता है.