पश्चिम बंगाल में जनसंघ से बीजेपी तक... 74 साल का सफर, 9 सीटों से 186 सीटों के तक पहुंची पार्टी, जानिए सफर की कहानी

Global Bharat 04 May 2026 04:18: PM 3 Mins
पश्चिम बंगाल में जनसंघ से बीजेपी तक... 74 साल का सफर, 9 सीटों से 186 सीटों के तक पहुंची पार्टी, जानिए सफर की कहानी

नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए राज्य की सबसे बड़ी ताकत बनती नजर आ रही है. 2 फरवरी 2024 को पार्टी बनाने वाले विजय ने शुरुआत से ही साफ कर दिया था कि उनका लक्ष्य लोकसभा चुनाव नहीं, बल्कि सीधे 2026 विधानसभा चुनाव है. यही वजह रही कि उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और पूरा फोकस संगठन मजबूत करने और बूथ स्तर तक तैयारी पर रखा.

29 मार्च 2026 को TVK ने तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला. शुरुआती रुझानों में पार्टी 113 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है. वहीं मौजूदा सत्ताधारी डीएमके पिछड़ती नजर आ रही है और तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. यह रुझान तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

विजय के पूरे चुनाव अभियान में चार बड़े मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख, सामाजिक न्याय, युवाओं की राजनीति में भागीदारी, और शिक्षा व रोजगार. उन्होंने खुद को पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के विकल्प के तौर पर पेश किया.  खासतौर पर युवा वोटरों, पहली बार मतदान करने वालों और शहरी वर्ग में TVK को अच्छा समर्थन मिलता दिखा.

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं और TVK सरकार बनाने में सफल रहती है, तो यह भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक पल होगा. सिर्फ दो साल पहले बनी पार्टी का सीधे सत्ता के करीब पहुंच जाना बेहद असाधारण माना जाएगा. तमिलनाडु, जहां दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है, वहां विजय ने तीसरा मजबूत विकल्प खड़ा कर दिया है. अब सबकी नजर अंतिम नतीजों पर टिकी हुई है.

बंगाल : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी 186 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और करीब 45 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करती दिख रही है. अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं तो यह राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा. दरअसल, पश्चिम बंगाल में बीजेपी और उससे पहले भारतीय जनसंघ की यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण रही है. 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने 9 सीटें जीती थीं और 5.8% वोट हासिल किए थे, इसके बाद 1957 से 1971 तक पार्टी का प्रदर्शन लगभग खत्म हो गया. इस दौरान जनसंघ कोई सीट नहीं जीत सकी और वोट शेयर करीब एक प्रतिशत के आसपास सिमट गया. 

1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हुआ. उस चुनाव में जनता पार्टी ने 15 सीटें जीतीं और 21.46 प्रतिशत वोट हासिल किए, लेकिन बीजेपी के गठन के बाद पश्चिम बंगाल में पार्टी को लंबा इंतजार करना पड़ा. 1982 से 2011 तक बीजेपी विधानसभा में खाता तक नहीं खोल सकी. 2016 में पहली बार पार्टी ने वापसी करते हुए 3 सीटें जीतीं और 10.16 प्रतिशत वोट हासिल किए, इसके बाद 2021 चुनाव में बीजेपी ने बड़ी छलांग लगाई और 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बन गई. तब पार्टी का वोट शेयर 38.15 प्रतिशत रहा. 

दिलचस्प बात यह है कि 2001 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी के साथ बीजेपी गठबंधन में थी, लेकिन तब भी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली थी और वोट शेयर सिर्फ 5.19 प्रतिशत रहा था. लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी की कहानी उतार-चढ़ाव भरी रही. 1952 में भारतीय जनसंघ ने 2 सीटें जीती थीं, इनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी कोलकाता दक्षिण-पूर्व और दुर्गा चरण बनर्जी मिदनापुर से जीते थे, इसके बाद लंबे समय तक पार्टी कमजोर रही.

1991 में बीजेपी को 11.66 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन सीट नहीं मिली। 1998 में एक सीट, 1999 में दो सीटें मिलीं. 2014 में पार्टी ने दो सीटों के साथ 17.02 प्रतिशत वोट हासिल किए. 2019 में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 18 सीटें और 40.64 प्रतिभत वोट हासिल किए. हालांकि, 2024 में सीटें घटकर 12 रह गईं, लेकिन वोट शेयर 38.73 प्रतिशत बना रहा. 

अब 2026 विधानसभा चुनाव के रुझान दिखा रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी का दशकों पुराना संघर्ष सत्ता की दहलीज तक पहुंच चुका है. 9 सीटों से शुरू हुआ सफर अब 186 सीटों की बढ़त तक पहुंच गया है, जिसने बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है. 

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