नई दिल्ली : नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच एक 8 साल के बच्चे की कहानी राहत और उम्मीद की वजह बनी है. बाढ़ में मां से बिछड़ा जोयल घाले चार दिन बाद शुक्रवार को अपनी मां मट्टी माया तमांग से मिल गया. बेटे के लापता होने के बाद मां को आशंका थी कि वह और उसका भाई स्कूल में आई बाढ़ की चपेट में आ गए होंगे.
जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त की सुबह जोयल और उसका भाई स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे. उस समय उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं. अचानक उन्हें तेज आवाज सुनाई दी. देखते ही देखते इलाके में पानी, पत्थर और मलबे का सैलाब आ गया. बताया गया कि लांगटांग लिरुंग पर्वत के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से यह भयावह स्थिति बनी और तेज बहाव घाटी की ओर आ गया.
बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयल जंगल की तरफ भाग गया. उसने एक पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई. इस दौरान उसके पैर में चोट आई और चेहरे पर भी कट के निशान लगे. बाद में राहत एवं बचाव अभियान के दौरान उसे रसुवा जिले से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया.
उधर, बेटे की तलाश में मां मट्टी माया कई राहत शिविरों के चक्कर लगाती रहीं. जब वह स्कूल पहुंचीं तो वहां का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए. स्कूल की इमारत पूरी तरह तबाह हो चुकी थी और आसपास का इलाका पहचान में नहीं आ रहा था. कई दिनों तक कोई खबर नहीं मिलने से उनकी उम्मीद टूटने लगी थी.
इसी बीच एक पत्रकार के जरिए उन्हें बेटे के सुरक्षित होने की जानकारी मिली. शुक्रवार को फोन पर मां ने जोयल से बात की और फिर उसे लेने काठमांडू के अस्पताल पहुंचीं. चार दिन बाद बेटे को सामने देखकर परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था. नेपाल में जारी तबाही के बीच जोयल की सुरक्षित वापसी ने लोगों को उम्मीद की एक किरण दी है.