दादा बांग्लादेशी, मां नेपाली और बिटिया भारत में जीती चुनाव, सबा खातून की करतूतों से दिल्ली तक मचा हड़कंप

Abhishek Chaturvedi 28 Oct 2024 09:58: PM 3 Mins
दादा बांग्लादेशी, मां नेपाली और बिटिया भारत में जीती चुनाव, सबा खातून की करतूतों से दिल्ली तक मचा हड़कंप

बिहार बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह जब हिंदू स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे थे, कह रहे थे हर हिंदू अपने हाथ में त्रिशूल रखे, तब बिहार के दरभंगा में मुस्लिम  महिला का एक ऐसा खेल पकड़ा जा रहा था, जिसे सुनकर दिल्ली में बैठे चुनाव आयोग के बड़े-बड़े अधिकारी भी हिल गए. तस्वीरों में दिख रही इस महिला का नाम है सबा खातून, मां हमीदा खातून नेपाल की रहने वाली हैं, कुछ साल पहले सबा का मुलाकात बिहार के रहने वाले जावेद आलम से होती है, जो दरभंग के कोठिया गांव का रहने वाला है, दोनों निकाह करते हैं और सबा न सिर्फ हिंदुस्तान में रहने लगती है, बल्कि वो पंचायत चुनाव में मुखिया पद की प्रत्याशी बन जाती है.

कुछ ही साल में ये लोगों के बीच पकड़ ऐसी बना लेती है कि चुनाव जीतकर मुखिया बन जाती है, ऐसे में पोल खुलना और मुश्किल हो जाता है. पर एक गलती से कैसे पूरी पोल खुलती है, वो सुनेंगे तो आप भी कहेंगे गिरिराज सिंह के स्वाभिमान यात्रा से पहले ही बिहार का हर नागरिक जागा हुआ है, और वो गलत काम की भनक लगते ही सीधा शिकायत लेकर पहुंच जाता है. कोठिया गांव का ही रहने वाला जितेन्द्र जिला निर्वाचन अधिकारी को ये शिकायत देता है कि सबा खातून नेपाल की रहने वाली है, इनके पूर्वज बांग्लादेशी हैं, ऐसे में इन्हें चुनाव लड़ने का ही हक नहीं है, इस सीट पर दोबारा चुनाव होने चाहिए. जांच के बाद पता चलता है कि...

  • सबा खातून मूल रूप से नेपाल के मधेश प्रदेश में पड़ने वाले सिरहा की रहने वाली है
  • 3 मार्च 2024 को सबा ने नेपाल की नागरिकता छोड़ दी थी, लेकिन चुनाव पहले हुआ था
  • बिहार के ग्राम पंचायत में जब सबा खातून ने हिस्सा लिया, तब वो नेपाली नागरिक भी थी
  • जिला निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जानकारी पटना भेजी, तब जाकर यहां चुनाव रद्द हुआ
  • अब फर्जीवाड़े के आरोप में सबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं

हालांकि हिंदुस्तान के लिए ये पहला मामला नहीं है, पश्चिम बंगाल में तो बकायदा एक बांग्लादेशी को ममता बनर्जी की पार्टी ने विधायक बना दिया था. मामला हाईकोर्ट गया तब ममता सरकार को फटकार लगी, ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर बाहर से आने वाले इतनी आसानी से हमारे यहां फर्जी कागजात बनवा कैसे रहे हैं, और फिर सरकारी अधिकारी उन दस्तावेजों को पकड़ क्यों नहीं पा रहे हैं. तो इसके पीछे की कहानी भी समझ लीजिए.

कई रिपोर्ट ये दावा करते हैं कि बांग्लादेश से आने वाले लोग पश्चिम बंगाल के रास्ते घुसपैठ करके हिंदुस्तान में घुसते हैं, वहां के कुछ लोग उनकी मदद करते हैं, फर्जी कागजात बनते हैं और फिर वो देश के अलग-अलग हिस्सों में बस जाते हैं. अभी गुजरात के अहमदाबाद से ऐसे ही 51 बांग्लादेशियों को पुलिस ने पकड़ा है, जो झील की जमीन पर कब्जा कर घर बनाकर रह रहे थे. उससे पहले यूपी के रायबरेली से पुलिस ने जीशान नाम के लड़के को पकड़ा था, जो ऐसे लोगों के फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और तमाम दस्तावेज बनाता था.

यानि अपने ही मुल्क में कुछ ऐसे जयचंद बैठे हैं, जो अपने ही सिस्टम को खोखला करने में लगे हैं, कुछ नेता सियासत की खातिर ऐसा कर रहे हैं, वोटबैंक बढ़ाने की खातिर ऐसा कर रहे हैं तो कुछ लोग चंद पैसों की खातिर घुसपैठियों के हिंदुस्तान में बसने का इंतजाम कर रहे हैं. और ये सिर्फ पश्चिम बंगाल या बिहार में नहीं हो रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश में तो सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी पर भी ये आरोप लगे. जिन्होंने बांग्लादेशी नागरिक रिजवान की खुलकर मदद की, रिजवान ने कानपुर की हिना से निकाह किया, और उसे लेकर बांग्लादेश चला गया, वहां जाकर हिना भी बांग्लादेशी हो गई, लेकिन कुछ साल बाद दोनों वापस हिंदुस्तान आ गए, यहां फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर न सिर्फ रहने लगे, बल्कि अपने तीन बच्चों का दाखिला भी स्कूल में फर्जी कागजों के आधार पर करवा दिया, जब पूरी कहानी खुली तो पुलिस भी दंग रह गई, इसलिए सतर्क रहिए, सावधान रहिए. और एनआरसी की अहमियत को समझिए.

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