देहरादून : उत्तराखंड के देहरादून मे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दौरे के दौरान उनके काफिले में करीब 35 गाड़ियां शामिल रहने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समय-समय पर देश में ईंधन बचत और अनावश्यक काफिलों को सीमित रखने की अपील की जाती रही है. ऐसे में इतने बड़े काफिले को लेकर विपक्ष और कुछ स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह अपील की भावना के अनुरूप है या नहीं.
हालांकि प्रशासनिक और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत वीआईपी मूवमेंट में वाहनों की संख्या तय करना सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है, लेकिन फिर भी इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है. आलोचकों का कहना है कि जब एक तरफ ईंधन बचत और संयम की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ बड़े काफिले उस संदेश को कमजोर करते हैं.
वहीं, भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि काफिले की व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षा और प्रोटोकॉल के अनुसार होती है, और इसे राजनीतिक दृष्टि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. कुल मिलाकर यह मामला अब सिर्फ दौरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईंधन बचत, वीआईपी संस्कृति और राजनीतिक संदेशों की विश्वसनीयता को लेकर भी बहस का विषय बन गया है.