इंदौर: मध्य प्रदेश की कमर्शियल राजधानी इंदौर में हनीट्रैप का दूसरा बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस ने एक महिला गैंग के पास से 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो बरामद किए हैं, जिनमें राजनेता, पुलिस अधिकारी, बिजनेसमैन और प्रभावशाली लोगों के क्लिप्स बताए जा रहे हैं. इन वीडियो के जरिए आरोपी लाखों-करोड़ों रुपए की ब्लैकमेलिंग कर चुके थे और कई और सौदे पाइपलाइन में थे.
मुख्य आरोपी रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी के मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से ये वीडियो मिले. पुलिस ने शनिवार को उसे भोपाल और सागर ले जाकर उसके ठिकानों की तलाशी ली. सागर स्थित घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और पुरानी ऑडियो रिकॉर्डिंग्स भी जब्त की गईं.
धमकियों और राजनीतिक प्रभाव की रिकॉर्डिंग्स
पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए. एक ऑडियो में रेशु एक स्थानीय नेता के रिश्तेदार को चेतावती देते हुए कहती सुनाई दे रही है कि मुंह खोला तो कई लोगों का राजनीतिक भविष्य खत्म हो जाएगा. दूसरी रिकॉर्डिंग में वह एक महिला नेता के पुरुष रिश्तेदार को परिवार की प्रतिष्ठा बर्बाद करने की धमकी दे रही है. रेशु खुद को यूक्रेन से पढ़कर लौटी डॉक्टर बताती थी और मकरोनिया क्षेत्र से पार्षद चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रही थी.
मास्टरमाइंड कौन?
जांच में पता चला कि पूरा रैकेट श्वेता विजय जैन (भोपाल) के निर्देशन में चलाया जा रहा था. श्वेता सामने नहीं आती थी, बल्कि रेशु को ट्रेनिंग और टारगेट की जानकारी देकर काम करवाती थी. दोनों मिलकर संपर्कों का जाल बुनती थीं.
शिकार कौन-कौन?
आरोपियों ने वीडियो बेचने की भी तैयारी कर रखी थी. एक वीडियो को राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने के भी संकेत मिले हैं. यह पूरा मामला इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत से सामने आया. 28 अप्रैल 2026 को सुपर कॉरिडोर पर अलका दीक्षित और उसके साथियों ने चिंटू के साथ मारपीट की और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दी. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की.
पुलिस ने रेशु और श्वेता के अलावा जयदीप, लाखन चौधरी, पत्रकार जितेंद्र पुरोहित और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार किया है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस रैकेट को किसी प्रशासनिक या पुलिस संरक्षण की मदद मिली थी या नहीं. इंदौर क्राइम ब्रांच की कई टीमें इस मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं. आगे और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है.