Ola Uber Rapido new rules: ओला-उबर या रैपिडो बुक करने वाले नए नियम पर ध्यान दें, गडकरी लाए नया नियम, ओला-उबर पीक आवर्स में वसूल सकेंगे दोगुना किराया!

Abhishek Chaturvedi 07 Jul 2025 06:34: PM 3 Mins
Ola Uber Rapido new rules: ओला-उबर या रैपिडो बुक करने वाले नए नियम पर ध्यान दें, गडकरी लाए नया नियम, ओला-उबर पीक आवर्स में वसूल सकेंगे दोगुना किराया!
  • अब नहीं चलेगी 8 साल पुरानी कैब, ड्राइवर कैंसिल करे राइड या यात्री, लगेगा 10 फीसदी जुर्माना

Ola Uber Rapido new rules: कैब कंपनियों, कैब से सफर करने वाले यात्रियों और कैब चलाने वाले ड्राइवर्स के लिए केन्द्र सरकार एक नया नियम लेकर आई है, जिसका नाम है मोटर यान एग्रीगेटर दिशा-निर्देश 2025...ये उसी आदेश की कॉपी है, जिसे 1 जुलाई को नितिन गडकरी के केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने जारी किया है. इसमें 7 बड़े आदेश लिखे हैं. जिसके बारे में पहले सुनिए, फिर बताते हैं कई लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं.

  • आदेश नंबर 1-  कोई भी टैक्सी सर्विस कंपनी ओला, उबर या रैपिडो कुछ भी हो, उसे रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.
  • आदेश नंबर 2- पीक आवर्स यानि सुबह-शाम जब डिमांड हाई होती है, कैब कंपनियां दोगुना किराया ले सकेंगी. यानि जहां 100 किराया लगता था वो 200 हो जाएगा.
  • आदेश नंबर 3- नॉन पीक आवर्स में बेस किराया जो तय है, उससे कम से कम 50 फीसदी किराया देना होगा. बेस किराया राज्य सरकारें गाड़ी के हिसाब से तय करती हैं
  • आदेश नंबर 4- 8 साल से पुरानी गाड़ियां टैक्सी में नहीं चल सकेंगी, ड्राइवर को अपनी सीट के पीछे गाड़ी की परमिट और अपने लाइसेंस की कॉपी लगानी होगी.
  • आदेश नंबर 5- सभी गाड़ियों में ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगाना जरूरी होगा. ड्राइवर को 40 घंटे की ट्रेनिंग लेनी होगी. जिसमें मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन भी होगा.
  • आदेश नंबर 6- ड्राइवर बेवजह कैब कैंसिल करता है तो उसे बेस किराए का 10 फीसदी जुर्माना देना होगा, अगर कोई यात्री बेवजह करेगा तो उसे भी यही जुर्माना देना होगा.
  • आदेश नंबर 7- ड्राइवर को 5 लाख का हेल्थ बीमा और 10 लाख का टर्म इंश्योरेंस भी मिलेगा, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो.

ये सारे नियम लागू करने के लिए राज्यों को तीन महीने का वक्त दिया गया है, 1 जुलाई 2025 को आदेश जारी हुआ है, यानि सितंबर 2025 के बाद पूरे देश में ये नियम लागू हो जाएगा. आप कहेंगे इससे तो यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी औऱ ड्राइवर के लिए भी ये फायदेमंद है, किराया बढ़ने से कैब कंपनियों को भी फायदा मिलेगा तो फिर विरोध किस बात का, तो ये विरोध ठीक वैसा ही है जैसे दिल्ली में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ी पर बैन लगाने को लेकर हुआ, बकायदा पेट्रोल पंप पर पुलिसकर्मी पहरा देने लगे और जैसे ही गाड़ी आई उसे सीज करने लगे, विरोध के बाद ये आदेश स्थगित हो गया. लोगों की कई गाड़ियां जो ज्यादा नहीं चली थी, उन्हें बेचनी पड़ रही थी, क्योंकि 10 साल पुरानी पेट्रोल कार लेकर निकले मतलब वो सीज हो जाएगी.

अब यहां कैब कंपनियों के लिए 8 साल पुरानी गाड़ी को जो नियम आया है, उसमें दिक्कत ये है कि कई ड्राइवर्स ने EMI पर कार खरीदी होती है, और बैंक से लोन लेकर गाड़ी खरीदने का मतलब है कम से कम 4 साल आप लोन भरेंगे, उसके बाद आपके पास कमाने के लिए 4 साल का वक्त है, और फिर नई गाड़ी लेनी होगी. सरकार ने ये फैसला दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से लिया है. वैसे यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी ये बिल्कुल ठीक है कि उन्हें फिट गाड़ियां मिलेंगी, लेकिन 8 साल पुरानी गाड़ी का नियम ड्राइवर्स पर बोझ बताया जा रहा है. उन्हें बड़ा नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि इस नियम को लेकर भी कई तरीके के सवाल उठने लगे हैं. आपको याद होगा कुछ दिनों पहले नितिन गडकरी टोल टैक्स का एक नया नियम लेकर आए थे, जिसमें 3 हजार रुपये देकर आप एक साल तक के लिए टोल टैक्स पास बनवा सकते थे, 1 साल या 200 सफर जो पहले पूरा हो जाए तब ये पास खत्म हो जाता, जिसे लेकर भी कई सवाल उठे. और सवाल स्पष्टता की कमी को लेकर भी थे.

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