दिल्ली की नई सरकार का नया नियम है, 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ी और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी लेकर अगर दिल्ली में घुसे तो वो जब्त हो जाएगी. पेट्रोल पंप पर गलती से चले गए, तो पेट्रोल भी नहीं मिलेगा. 1 जुलाई से ये नियम लागू हुआ और पहले दिन करीब 80 गाड़ियां जब्त हुई, जिनमें से परिवहन विभाग ने 45, दिल्ली पुलिस ने 34 और नगर निगम ने 1 गाड़ी जब्त की. करीब 62 लाख गाड़ियों की उम्र पूरी हो चुकी है, जिन्हें पकड़ने के लिए 350 पेट्रोल पंप पर कड़ा पहरा रहा. लेकिन दूसरे ही दिन दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी और उसके बाद जो हुआ, उसे सुनकर आप भी कहेंगे दो दिन में ही नया नियम हवा हो गया.
“सेक्शन 192 (1) ड्राइवर और मोटर व्हीकल पर लागू होता है. सरकार की पॉलिसी ठीक है, लेकिन हमारा काम है पेट्रोल-डीजल देना, हमें किसी को ऐसे मना करने का अधिकार नहीं है. एक पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन लगभग तीन हजार गाड़ियां तेल भरवाने आती हैं, ऐसे में ये पता करना कि कौन सी गाड़ी की उम्र पूरी हो गई और किसकी नहीं हुई मुश्किल काम है.”
इसे लेकर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और AQCM यानि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को नोटिस जारी किया है, चूंकि आदेश AQCM ने ही दिया है, इसलिए उसकी भी बड़ी जिम्मेदारी है. लेकिन आम जनता पर इसका सबसे बुरा असर पड़ रहा है. दिल्ली में रहने वाले वरुण कहते हैं
“मैंने अपनी जिंदगी की पहली लग्जरी गाड़ी मर्सिडीज साल 2015 में खरीदी थी, 10 साल पुरानी होने के बाद भी वो बिल्कुल ठीक हालत में थी. लेकिन नया नियम आते ही 84 लाख की वो मर्सिडीज मुझे ढाई लाख में बेचनी पड़ी.”
मतलब पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर जिन्होंने गाड़ी खरीदी वो भी अब दिल्ली में पैदल चलने को मजबूर होंगे. इसीलिए जब हंगामा बढ़ा तो दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AQCM को लेटर लिखकर ये कहा है कि पेट्रोल पंप पर जुर्माना लगाने के फैसले पर विचार किया जाए, पेट्रोल पंप मालिकों की ये दलील है कि हमारे पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है, और सरकार बीते दो सालों में काफी कम गाड़ियां जब्त कर पाई हैं, इसलिए वो इसे आउटसोर्स के जरिए हमारे ऊपर थोप रही है, जबकि प्रदूषण रोकने को लेकर जो आदेश जारी हुआ है, उसे पालन करवाना सरकार का काम है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा कहते हैं
“जब तक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचानने वाला सिस्टम (ANPR) पूरे एनसीआर में पूरी तरह नहीं लग जाता, तब तक इस नियम को लागू न किया जाए। सरकार वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठा रही है और इसका असर जल्द दिखेगा।“
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के विशेष आयुक्त अजय चौधरी का दावा है
“यह अभियान लगातार जारी रहेगा. 1 नवंबर से दिल्ली से सटे क्षेत्रों में भी ओवरएज वाहनों को ईंधन देने पर रोक लागू की जाएगी. जब्त किए गए वाहनों के मालिक 15 दिनों के भीतर जुर्माना भरकर और दिल्ली से बाहर वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेकर वाहन वापस ले सकते हैं.”
यानि आप चाहें तो अपनी गाड़ी छुड़वाकर दूसरे राज्य में ले जा सकते हैं, लेकिन सवाल है दिल्ली के अलावा एनसीआर में अगर ये आदेश लागू नहीं होगा तो क्या इसका कोई खास फर्क पड़ेगा, क्योंकि एनसीआर में और आसपास के राज्यों में अगर ऐसी पुरानी गाड़ियां चलती रहेंगी तो फिर कैसे प्रदूषण कम होगा. नेहा सिंह राठौर तो इसे लेकर ट्विटर पर लिखती हैं
“सरकार लोगों की पर्सनल गाड़ियां बंद करवाकर प्राइवेट कैब को बढ़ावा देना चाहती है.”
हालांकि इससे पहले केजरीवाल सरकार के दौरान भी प्रदूषण रोकने को लेकर तमाम नीतियां आईं, ऑड, ईवन से लेकर बसों से चलने तक की प्लान लागू किया गया, सुप्रीम कोर्ट भी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर काफी सख्त रहा है, लेकिन अब पेट्रोल पंप पर जिस तरह से जुर्माने की बात सामने आई है, उसे लेकर प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में एक रोड़ा अटकने लगा है, और अब दिल्ली सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, AQCM यानि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग क्या कोई नया आदेश जारी करने वाला है.