लखनऊ : यूपी की सियासत में एक के बाद एक मुलाकातें 2027 के चुनावी समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रही हैं. पहले योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने सपा के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की और अब सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर भी उनसे मिलने की बात कह रहे हैं. राजभर का कहना है कि वह माता प्रसाद पांडेय का हालचाल लेने जाएंगे.
संजय निषाद की मुलाकात को उन्होंने शिष्टाचार भेंट बताया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी रास्ता बंद करती है तो सपा के विकल्प पर विचार किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों को चुनाव में जीतने वाली सीटें दिए जाने की बात कही.
यहीं से राजभर की मुलाकात को लेकर सियासी सवाल और बड़ा हो जाता है. क्या दोनों सहयोगी दल बीजेपी पर सीट बंटवारे को लेकर दबाव बनाने की रणनीति पर हैं या फिर चुनाव से पहले विपक्षी खेमे के नेताओं से संवाद बनाए रखने की कोशिश हो रही है. फिलहाल इसका कोई आधिकारिक संकेत नहीं है.
ओपी राजभर और सपा का राजनीतिक रिश्ता भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. राजभर पहले सपा के साथ रहे, फिर एनडीए में लौटे और योगी सरकार में मंत्री बने. ऐसे में उनका माता प्रसाद पांडेय से मिलना सीधे गठबंधन का ऐलान नहीं माना जा सकता, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है.
2027 के चुनाव से पहले सीटों और सामाजिक समीकरणों को लेकर सहयोगी दल अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं. ऐसे में मुलाकातें भले शिष्टाचार की हों, लेकिन उनके बीच होने वाली बातचीत पर सियासी नजरें जरूर टिकी रहेंगी. फिलहाल खिचड़ी पकने की चर्चा जरूर है, लेकिन हांडी में क्या है, इसका खुलासा अभी बाकी है.