नई दिल्ली: शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई. यह करीब चार साल बाद हुई पहली बड़ी बढ़ोतरी है. फिर भी, दुनिया के बाकी देशों की तुलना में भारत में ईंधन महंगा होना सबसे कम रहा. इस अवधि में भारत में पेट्रोल महंगा सिर्फ 3.2% और डीजल 3.4% ही बढ़ा है.
वहीं कई दूसरे देशों में स्थिति काफी अलग है. पाकिस्तान, म्यांमार, मलेशिया और अमेरिका जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें 40% से 89% तक बढ़ चुकी हैं. कुछ बाजारों में डीजल तो 100% से भी ज्यादा महंगा हो गया है.
क्यों हुई यह बढ़ोतरी?
दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई को लेकर चिंता और पश्चिम एशिया (ईरान संबंधी) तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है. भारत सरकार ने पिछले कई सालों तक खुदरा कीमतों को लगभग स्थिर रखा, जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली. तेल कंपनियां इस दौरान घाटा सहन करती रहीं. अब दबाव बढ़ने के बाद सीमित बढ़ोतरी की गई है.
पाकिस्तान-नेपाल का हाल
पाकिस्तान में पहले से ही पेट्रोल-डीजल काफी महंगे हैं और हाल के महीनों में वहां भी कई बार बढ़ोतरी हुई है. नेपाल में भी भारतीय कीमतों से आमतौर पर थोड़ा अलग (कई बार ज्यादा) रेट रहता है, क्योंकि दोनों देश कच्चा तेल आयात पर निर्भर हैं. 3 रुपए की यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर देखें तो बहुत नियंत्रित और संतुलित है. भारत ने लंबे समय तक कीमतों को दबाकर रखा, जबकि कई देशों में ईंधन की कीमतें तेजी से चढ़ गईं.