महाकुंभ में अपनों से बिछड़े लोगों की ये तस्वीरें आंखों में आंसू ला देंगी, नहीं देख पाएंगे तस्वीरें

Deepa Bisht 01 Feb 2025 05:12: PM 2 Mins
महाकुंभ में अपनों से बिछड़े लोगों की ये तस्वीरें आंखों में आंसू ला देंगी, नहीं देख पाएंगे तस्वीरें
  • बेटे ने मां-बाप को छोड़ा अकेला
  • 10 मार्मिक तस्वीरें रुला देंगी
  • महाकुंभ से सामने आई भयावह कहानी!

Mahakumbh: कहते हैं तस्वीरें झूठ नहीं बोलती, ये न सरकार के दावे देखती हैं, न अधिकारियों की हनक, दुख हो तो आंखों में आंसू आ जाते हैं, व्यवस्था अच्छी हो तो खुशी से चेहरा खिल उठता है, ये 10 तस्वीरें उसी की बानगी हैं.

पहली तस्वीर एक बूढ़ी मां की है, जो खोया-पाया केन्द्र के पास बैठी हैं, इस उम्मीद में कि जो लड़के उनसे बिछड़ गए हैं, वो आएंगे और घर ले जाएंगे.

जबकि दूसरी तस्वीर पोस्टमार्टम हाउस के बाहर की हैं, जहां एक महिला हाथों में कागज लिए, रोते हुए फोन लगाती नजर आ रही है.

तीसरी तस्वीर इस सिस्टम की सच खोलती है, जहां पिकअप जैसी गाड़ी से अपनों की बॉडी लेकर लोग घर जा रहे हैं.

जबकि चौथी तस्वीर उन चार लोगों की है, जिनके आंखों में आंसू तो है, पर दिल पर पत्थर रखकर घरवालों को फोन कर भगद़ड़ की ख़बर सुना रहे हैं.

पांचवीं तस्वीर आपको इंसान होने के नाते लोगों तक पहुंचानी चाहिए, इसमें फोटो के साथ गुमशुदा लोगों के बारे में जानकारी लिखी है, ऐसे पोस्टर प्रयागराज में जगह-जगह चस्पा किए गए हैं, ताकि इन लापता लोगों तक उनके परिजन पहुंच सके.

छठी तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है, जहां एक दीवार पर कई लोगों की तस्वीरें लगाता एक व्यक्ति नजर आ रहा है, शायद वो अस्पताल या निगम का कर्मचारी हो, जो लोगों की पहचान के लिए इन तस्वीरों को बाहर चस्पा कर रहा है,

आठवीं तस्वीर में आप देख सकते हैं, कैसे इन तस्वीरों को मोबाइल से क्लिक कर लोग घर तक पहुंचा रहे हैं, उन लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां से ये आए हैं, और कुंभ मेले में मची भगदड़ के दौरान लापता हो गए.

नौंवी तस्वीर प्रशासन के दावों की पोल खोलती है, जहां दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में हेल्पलाइन नंबर 1902 और खोया-पाया केन्द्र लिखा है, लेकिन वहां जाकर भी लोग मिल नहीं रहे हैं, अनाउंसमेंट के बाद भी अपनों की तलाश में जुटे परिजनों के हाथ खाली हैं, एक महिला फोन पर बात कर रही है, तो वहीं बाकी लोग मायूस बैठे हैं, शायद इस उम्मीद में कि कहीं से कोई ख़बर मिले फिर कंबल समेटकर वापस उसी घर में पहुंच जाएं, जहां से आए थे.

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लेकिन दसवीं तस्वीर इन सबसे अलग है, वो तस्वीर एक ऐसे मां-बाप की है, जो महाकुंभ में बिछड़े नहीं, बल्कि उन्हें छोड़ दिय़ा गया, तीन बेटे और बहुओं ने इन्हें घर से निकाल दिया है, ठंडी रात में एक चादर के सहारे ये बुजुर्ग पति-पत्नी अपनी लाचारी बयां कर रहे हैं, ऐसे औलादों के लिए आप क्या लिखना चाहेंगे, कमेंट में एक शब्द जरूर लिखिए.  


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