नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय मामलों के राज्य मंत्री एल मुरुगन ने मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से एक साथ इस्तीफा दे दिया है. उनका मकसद 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु में भाजपा को संगठनात्मक रूप से मजबूत करना है.
मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत माता और तमिलनाडु की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है. एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद तक का सफर मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है.”
उन्होंने आगे कहा कि अब वे जमीनी स्तर पर लौटना चाहते हैं. कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होकर तमिलनाडु में पार्टी का विस्तार करना उनकी प्राथमिकता है. मुरुगन ने स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए राज्य में भाजपा को मजबूत बनाने के लिए वे अपना पूरा समय देंगे.
राज्यसभा की सीट भी खाली
एल मुरुगन 2021 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे. 2024 में उन्हें दूसरी बार सदस्य चुना गया था. उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तमिलनाडु से जुड़ी उनकी सीट खाली हो जाएगी. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मुरुगन अब पूर्णकालिक रूप से राज्य स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने पर फोकस करेंगे.
मुरुगन लंबे समय से केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में काम कर रहे थे. वे सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ संसदीय मामलों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे. उनके इस कदम से भाजपा को तमिलनाडु में संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुरुगन का यह फैसला स्वैच्छिक है और वे पीएम मोदी के नेतृत्व में किए गए काम को अपना सबसे बड़ा सम्मान मानते हैं. अब देखना यह होगा कि तमिलनाडु की राजनीति में उनका यह कदम भाजपा के लिए कितना प्रभावी साबित होता है.