जहां एसपीजी कमांडो का दिमाग खत्म हो जाता है, वो आईपीएस वहां से सोचना शुरू करता है, जब एसपीजी कमांडोज मोदी को कहते हैं, वापस चलो, वो मोदी से कहता है सर सिर्फ 5 मिनट दीजिए, आपकी सुरक्षा के लिए जान लगा देंगे, आपको जहां जाना है, वहां सुरक्षित पहुंचाकर ही मानेंगे, और मोदी न सिर्फ इस आईपीएस की बात मानते हैं, बल्कि बाद में पीठ भी थपथपाते हैं.
तारीख थी 15 सितंबर 2024, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हेलीकॉप्टर रांची एयरपोर्ट पर लैंड करता है, वहां से जमशेदपुर जाना होता है, एयर ट्रैफिक वाले कहते हैं साहब मौसम खराब है, अचानक सड़क मार्ग से जाने का प्लान बनता है, लेकिन रास्ते में चार-चार नक्सल प्रभावित जिले पड़ते हैं, जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजारना सुरक्षित नहीं था, कहीं भी सड़क पर कुछ भी रखा हो सकता था, देश के दुश्मनों के लिए ये अच्छा मौका था, इसीलिए एसपीजी मोदी को वापस लौटने के लिए कहती है, लेकिन जैसे ही बात डीजीपी अनुराग गुप्ता तक पहुंचती है, वो तुरंत एडीजी ऑपरेशन संजय लाटकर से सलाह लेते हैं, और संजय लाटकर 5 मिनट के भीतर राज्य की खुफिया यूनिट, एसटीएफ, एटीएस और पैरामिलिट्री फोर्स के साथ बातचीत कर ऑपरेशन सेफ्टी का प्लान तैयार करते हैं.
मोदी की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन सेफ्टी
रांची से जमशेदपुर की दूरी करीब 125 किलोमीटर है, इतनी लंबी दूरी के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए आगे-आगे झारखंड पुलिस के जवान का काफिला, गाड़ी में एसटीएफ और स्पेशली ट्रेंड कमांडोज, बीच में पैरामिलिट्री फोर्स के घातक कमांडोज, उसके बाद पीएम मोदी का काफिला, और आखिर में झारखंड पुलिस के जवानों के साथ काफिला निकलता है.
रास्ते के बीच में एसपीजी कमांडोज को चिंता सताती है, लेकिन संजय लाटकर का प्लान इतना फुलप्रूफ था कि कोई भी दुश्मन बीच रास्ते में आने की हिमाकत नहीं कर पाता, और मोदी न सिर्फ सुरक्षित जमशेदपुर पहुंचते हैं, बल्कि वहां जाकर ये भी कहते हैं कि हेलीकॉप्टर उड़ नहीं सकता था, इसलिए सड़क मार्ग के जरिए आपसे मिलने आया. मोदी का ये बयान बताता है सिंघम आईपीएस ने कितना फुलप्रूफ प्लान बनाकर उन्हें जमशेदपुर की जनता के बीच पहुंचाया.
कौन हैं आईपीएस संजय लाटकर
कहते हैं संजय लाटकर के नाम का नक्सलियों में ऐसा खौफ है कि वो इनका नाम सुनकर अपना प्लान बदल लेते हैं, और इनकी बहादुरी की पहली कहानी नहीं है, बल्कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जब गढ़वा में फंसे थे, तब भी जिले के अधिकारियों के साथ मिलकर इन्होंने ऐसा ही प्लान तैयार किया था. दरअसल गढ़वा में जैसे ही सभा खत्म कर राजनाथ सिंह हेलीकॉप्टर की ओर बढ़ने लगे, पायलट ने कहा साहब पेट्रोल खत्म हो गया है, देश के रक्षामंत्री के हेलीकॉप्टर का तेल बाइक और कार की तरह खत्म हो जाना औऱ ऐन मौके पर इसे बताना, सुरक्षाकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था, वो सोच रहे थे गढ़वा जो कभी नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था.
वहां से इन्हें कैसे सुरक्षित वापस निकाला जाए, आनन-फानन में रांची से तेल लाने के लिए गाड़ी रवाना होती है, लेकिन उससे पहले ही राजनाथ सिंह कहते हैं सड़क मार्ग से वापस चलते हैं, उनके कमांडोज मना करते हैं, पर झारखंड के सिंघम अधिकारी कुछ ही मिनटों में प्लान बनाकर दोनों मंत्रियों को सड़क मार्ग से न सिर्फ रैलीस्थल से वापस गढ़वा पहुंचाते हैं, बल्कि वहां से सीधा सड़क मार्ग से बनारस तक इन्हें छोड़ा जाता है, हेलीकॉप्टर पीछे-पीछे उड़ता हुआ आता है, ऐसे मुश्किल हालात में काम करने वाले अधिकारियों को एक सैल्युट तो बनता ही है.