नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को यूरोप तक अपना प्रसिद्ध चुनावी पंचलाइन लेकर पहुंच गए. नेदरलैंड्स की राजकीय यात्रा के दौरान द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने अपना चर्चित "झालमुड़ी" वाला रिमार्क दोहराया. भीड़ भरे कार्यक्रम में पीएम मोदी ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में जनता की भारी भागीदारी का जिक्र किया.
पीएम अभी बोल ही रहे थे कि भीड़ ने तालियों और जोरदार हर्षध्वनि से उन्हें बीच में ही रोक दिया. इस पर पीएम मुस्कुराए, रुके और वो लाइन बोल दी जो सुनते ही पूरा हॉल हंसते-हंसते लोट-पोट हो गया: "झालमुड़ी यहां भी पहुंच गई?" पिछले महीने बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने झाड़ग्राम में सड़क किनारे एक ठेले पर झालमुड़ी का कोन खाते हुए इसे राजनीतिक प्रतीक बना दिया था, जो लोगों के बीच काफी चर्चित हुआ था.
भीड़ को तुरंत रेफरेंस समझ आ गया. मजाक फीका नहीं पड़ा, बल्कि पूरा हॉल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा. इससे साबित हुआ कि कुछ चुनावी एक-लाइनर्स आधिकारिक डेलिगेशन्स से भी बेहतर यात्रा कर लेते हैं. यह टिप्पणी पीएम मोदी के बंगाल प्रचार के दौरान दिए गए मशहूर "झालमुड़ी" वाले व्यंग्य का कॉलबैक थी, जहां बंगाली स्ट्रीट फूड अचानक राजनीतिक शब्दाडंबर का हिस्सा बन गया था.
द हेग में इसे दोहराकर पीएम मोदी ने घरेलू राजनीतिक यादों को विदेशी आउटरीच के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में जोड़ दिया. लेकिन उस छोटे से "झालमुड़ी" वाले वाक्य ने पूरे कार्यक्रम का सबसे यादगार पल बना दिया. दर्शकों के लिए यह महज एक जोक नहीं, बल्कि बंगाल के गरमागरम चुनाव अभियान की तुरंत पहचानी जाने वाली याद थी, जहां हर वाक्य, हर नाश्ता और हर नारा राजनीतिक रंग ले लेता था.
और जैसा भारतीय स्वभाव है. हजारों किलोमीटर दूर भी एक तीखे स्ट्रीट फूड का जिक्र काफी था पूरे शाम को मसालेदार बना देने के लिए. पीएम मोदी की यह टिप्पणी महज कुछ सेकंड की थी, लेकिन यह एक शानदार राजनीतिक एनकोर साबित हुई. अगर बंगाल चुनाव की गर्मी मतदान के बाद ठंडी हो गई थी, तो प्रधानमंत्री ने मुस्कान के साथ इशारा कर दिया कि झालमुड़ी की पहुंच स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय है.