Azam Khan News : कलेक्टर-फलेक्टर कहकर मज़ाक उड़ाने वाले आज़म ख़ान आख़िरकार एक अधिकारी से बुरी तरह हार जाते हैं, लेकिन यहां दो ख़बर हैं, पहली वो IAS अधिकारी कौन हैं जिन्होंने मां के अपमान का बदला कानून के दायरे में लिया, दूसरी ख़बर ये है कि यूपी सरकार में ऐसा कौन है जो आज़म ख़ान केस को मैनेज करवाना चाहता है. MP-MLA कोर्ट में सुनवाई हो रही थी, आज़म ख़ान के वकील ने दावा, एक ऐसा दावा किया जिसने सबको हैरान कर दिया. MP-MLA कोर्ट में अभियोजन पक्ष के वकील दावा करते हैं. जज साहब सरकार को आज़म ख़ान से कोई परेशानी नहीं है, सरकार को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन एक अधिकारी नाराज़ है, अधिकारी की नाराज़गी की वजह से आज़म ख़ान को जेल में रहना पड़ रहा है. जबकि, सच्चाई ऐसी नहीं है.
योगी आदित्यनाथ खुद आज़म ख़ान को न माफी देना चाहते हैं ना बाहर लाना चाहते हैं, अगर वो चाहते ही तो फिर उन्हें जेल में ही क्यों रखा जाता. फिर सरकार की तरफ से कौन है जो आज़म ख़ान पर रहम कर रहा है. योगी आदित्यनाथ के पैरों में गिरकर आज़म ख़ान कई बार माफी मांग चुके हैं, जिसकी गवाही देती हैं ये तस्वीरें, योगी का रास्ता रोककर आज़म माफी ही तो मांग रहे थे, लेकिन कहां योगी ने माफ किया.
आज़म ख़ान सिर्फ सत्ता से नहीं टकराए बल्कि IAS-IPS लॉबी से भी पंगा लिया, कलेक्टर-फलेक्टर क्या होते. कहते हैं कि कोई कितना भी ताकतवर नेता होता है वो भूलकर अधिकारियों से पंगा नहीं लेता है, लेकिन आज़म को खुद पर इतना गुमान था कि उन्होंने एक चुनावी रैली में एक भाषण दिया था..जिस पर उन्हें दो साल के लिए दोषी माना गया है.
आंजनेय कुमार एक पढ़े-लिखे IAS अधिकारी हैं, वो उस वक्त DM थे, लेकिन संयोग देखिए आज भी वो मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर हैं, यानी रामपुर में आज भी कोई पत्ता उनके इशारे पर ही हिलता है, कोर्ट में आज़म के वकील ने इन्हीं का जिक्र किया कि सरकार को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन एक अधिकारी आज़म के पीछे हाथ धोकर पड़ा है. दोहरी मार जब इंसान पर पड़ती है तो भगवान भी साथ नहीं देते हैं, आज़म ख़ान इधर दो साल के लिए दोषी करार दिए गए, उधर उनके बेटे की सज़ा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही थी, आज़म ख़ान कितने भी ताकतवर हों अब वो कभी लौटकर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वो सत्ता से ही नहीं ब्यूरोक्रेसी की ताकत से टकराए, कोई भी नेता अब किसी भी अधिकारी का अपमान नहीं कर पाएगा, कोई भी अधिकारी किसी नेता का जूता साफ क्यों करेगा.
कोई आज़म ख़ान जैसा नेता किसी भी अधिकारी की मां की कोख को गाली नहीं दे पाएगा,. सत्ता बदलती है तो अच्छे-अच्छे ठीक हो जाते हैं, जैसा आज बंगाल की हालत है, कभी यूपी की हुआ करती थी, जहां आज़म जैसे कई डॉन थे जो सिस्टम को अपनी बपौती समझते थे, कलेक्टर को फलेक्टर कहते थे, लेकिन उसी कलेक्टर ने समझा दिया, कलेक्टर फलेक्टर नहीं होता है, कलेक्टर पढ़ा-लिखा इंसान होता है जो अपनी कलम से किसी नेता का गुरूर तोड़ सकता है.