मंदिर में प्रवेश पर महिलाओं के बाल काटे गए, चप्पलों की माला पहनाई और अर्धनग्न कर 2 किलोमीटर तक परेड कराई

Amanat Ansari 16 May 2026 11:19: PM 2 Mins
मंदिर में प्रवेश पर महिलाओं के बाल काटे गए, चप्पलों की माला पहनाई और अर्धनग्न कर 2 किलोमीटर तक परेड कराई

नई दिल्ली: उल्हासनगर, महाराष्ट्र से एक महिला और उसके परिवार के साथ मंदिर प्रवेश के विवाद को लेकर सार्वजनिक अपमान और हमले की घटना सामने आई है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है. पुलिस शिकायत के अनुसार, घटना उल्हासनगर के वाघरी नगर इलाके में हुई. एक स्थानीय जाति पंचायत ने कथित तौर पर एक राजपूत परिवार को मंदिर में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया था. 

हालांकि, परिवार इस प्रतिबंध का विरोध करता रहा और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. घटना वाले दिन मंदिर परिसर में एक धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोजन का आयोजन चल रहा था. पीड़ित परिवार के एक युवक ने इस प्रतिबंध पर आपत्ति जताई और कहा कि उसके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए उन्हें मंदिर में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए. इसके बाद युवक मंदिर परिसर में घुस गया, जिससे वहां मौजूद एक विशेष समुदाय के कुछ सदस्य नाराज हो गए.

आरोपियों ने युवक के मंदिर जाने के बाद पीड़ित परिवार के घर पर डंडे-रोडों से हमला कर दिया. पुरुष सदस्यों को मारपीट करने के बाद आरोपियों ने महिलाओं को निशाना बनाया और पुलिस में शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी. शिकायतकर्ता कांता प्रेम राजपूत (50) अपनी बहन गीता राजपूत और बेटी अंजलि के साथ सेंट्रल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने जा रही थीं, तभी आरोपियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया.

आरोपियों ने महिलाओं को सड़क पर घसीटा, उनके कपड़े फाड़े, अर्धनग्न किया, कैंची से बाल काटे. फिर उनके गले में चप्पलों की माला डालकर लगभग दो किलोमीटर तक सड़क पर परेड कराई. आरोपियों ने कई लोगों को जबरन उनके पैर छूने के लिए भी मजबूर किया. इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसमें महिलाओं पर सार्वजनिक रूप से हमला होते दिख रहा है, जबकि आसपास के लोग मोबाइल पर रिकॉर्डिंग कर रहे हैं.

पुलिस ने बताया कि पीड़ित और आरोपी दोनों परिवार एक ही समुदाय के हैं. रिपोर्ट्स में कहा गया कि पहले भी पीड़ित परिवार पर कुछ आरोप लगे थे, जिसके बाद परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा था. घटना के बाद पीड़ित परिवार पुलिस के पास पहुंचा. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शुरू में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कई घंटों बाद ही केस दर्ज किया. पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होने के बावजूद पुलिस ने मामूली धाराएं लगाईं.

सेंट्रल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत ज्युली वाघरी, विनू वाघरी, पप्पी वाघरी, नितिन थोरात, रोहित वाघरी, सोनू उर्फ बालू वाघरी, महेश वाघरी और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है. पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी और कई अन्य फरार हैं. पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों परिवारों के सदस्यों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं.

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