राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास कोलकाता की ऐसी कौन सी फाइल पहुंची कि वो गुस्से से लाल हो उठीं, उन्होंने बकायदा एक इंटरव्यू में ये तक कह दिया कि बस अब बहुत हो गया, तो क्या बहुत का मतलब ये है कि अब राष्ट्रपति शासन बंगाल में लागू होने वाला है, जो बीजेपी ये कह रही है कि बंगाल में संविधान खतरे में हैं, डॉक्टर्स को ममता बनर्जी खुलेआम धमकी दे रही हैं, राष्ट्रपति मुर्मू को भी ऐसा ही लगने लगा है, क्योंकि राष्ट्रपति मुर्मू ने जो कहा है, उसे सुनकर ममता बनर्जी के होश उड़े हुए हैं.
पीटीआई को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति मुर्मू कहती हैं. मैं घटना को लेकर निराश और डरी हुई हूं. अब बहुत हो चुका. समाज को ऐसी घटनाओं को भूलने की खराब आदत है. निर्भया केस के 12 साल बाद कई ऐसी घटनाएं हुईं. जिसे समाज ने भूला दिया. जब स्टूडेंट्स, डॉक्टर्स और नागरिक कोलकाता में प्रोटेस्ट कर रहे थे, तो अपराधी दूसरी जगहों पर शिकार खोज रहे थे. हमें अब शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपाने की बजाय इतिहास का सामना करना होगा.
राष्ट्रपति मुर्मू ने ये बयान विमेंस सेफ्टी, इनफ इज इनफ नाम के कार्यक्रम में दिया. पर टीएमसी के नेता सवाल इस बात पर उठा रहे हैं कि राष्ट्रपति को उन्नाव और हाथरस जैसी घटनाएं क्यों नहीं दिखीं, सिर्फ बंगाल ही क्यों. ये भी एक इत्तेफाक है कि उधर बंगाल में बीजेपी रैली निकालती है, ये कहती है कि यहां संविधान खतरे में है, और इधर राष्ट्रपति का बयान सामने आता है कि अब बस बहुत हो गया. राष्ट्रपति का पद वार-पलटवार का नहीं होता जो द्रौपदी मुर्मू इन आरोपों पर जवाब देंगी, पर सियासत से हटकर जरा सोचिए कि क्या मुर्मू के मन को पहुंची पीड़ा या देश की आधी आबादी के मन को पहुंचा दुख बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए पर्याप्त है. देश भावनाओं से नहीं चलता, कानून के हिसाब से चलता है, और कानून ये कहता है कि राष्ट्रपति के पास तीन स्थिति में राज्य का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की छूट है.
कब लगता है राष्ट्रपति शासन
अगर राज्य की कानून व्यवस्था बद से बदतर हो जाए या किसी पार्टी के पास बहुमत न हो, संविधान के हिसाब से राज्य न चल रहा हो, तो अनुच्छेद 355 के तहत राष्ट्रपति शासन लग सकता है.
कुछ दिनों पहले ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर राज्य की रिपोर्ट सौंपी है. ये जरूरी नहीं है कि राज्यपाल की रिपोर्ट के बाद ही इस तरीके का फैसला हो, बल्कि राष्ट्रपति को अगर लगे तो वो फैसला ले सकती हैं, फिर सवाल ये उठता है कि अगर बंगाल में राष्ट्रपति शासन लग गया तो क्या बदल जाएगा.
राष्ट्रपति शासन में क्या-क्या बदलेग
राज्य की पूरी मशीनरी केन्द्र के कंट्रोल में आ जाती है, जिसके बाद पश्चिम बंगाल में पुलिस स्तर पर बड़े फेरबदल हो सकते हैं, ये भी संभव है कि कमिश्नर से लेकर डीजीपी तक बदल दिए जाएं, क्योंकि इस केस में कोलकाता पुलिस पर कई आरोप लगे हैं. पर सवाल ये है कि क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जो कहा है कि अब बहुत हो गया, उसका मतलब राष्ट्रपति शासन से है या महिलाओं के साथ जो घटनाएं हो रही हैं, उनका मतलब उन घटनाओं से था कि अब और सख्त कानून लाने की जरूरत है.