बेंगलुरु: कर्नाटक में वंदे मातरम के गायन को लेकर विवाद और गहरा गया है. राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सरकार के उस फैसले का बचाव किया है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सिर्फ पहले दो छंद गाने का निर्देश दिया गया है. प्रियांक खरगे ने कहा कि यह फैसला महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान हस्तियों के दृष्टिकोण के अनुरूप है. उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और राज्य सरकार को उनसे देशभक्ति का पाठ सीखने की कोई जरूरत नहीं है.
भीड़ को संबोधित करते हुए खरगे ने कर्नाटक भाजपा के नेताओं बी.वाई. विजयेंद्र और आर. अशोक को खुली चुनौती दी. उन्होंने कहा कि अगर ये नेता टेलीप्रॉम्प्टर या कागज देखे बिना वंदे मातरम के सभी छंद गाकर दिखा दें, तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे.
उन्होंने सवाल किया कि भाजपा सत्ता में रहते हुए (अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल सहित) ऐसा कोई निर्णय क्यों नहीं लिया. खरगे ने आगे कहा, “हमारे पूर्वजों ने तय किया था कि सिर्फ दो छंद गाए जाएंगे. अब भाजपा और पीएम मोदी सभी छंद गाना चाहते हैं. क्या वे जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और टैगोर से भी बड़े हैं?”
हाईकोर्ट में याचिका
स बीच कर्नाटक हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार का आदेश केंद्र के निर्देशों के खिलाफ है. केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में सभी राज्यों को पत्र लिखकर वंदे मातरम के आधिकारिक छह छंदों वाले रूप का सख्ती से पालन करने को कहा था. याचिका में राज्य के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है.
केंद्र ने जनवरी में यह भी निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रगान और वंदे मातरम एक साथ बजाए जाएं तो सभी छह छंद गाए जाएं. वहीं कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए पार्टी कार्यक्रमों में सिर्फ दो छंद गाने का फैसला लिया है. भाजपा इस फैसले को तुष्टीकरण की राजनीति बता रही है, जबकि कांग्रेस सरकार इसे ऐतिहासिक परंपरा का पालन बता रही है.