यरुशलम: इजरायल के 2026 संसदीय चुनाव में त्रिशंकु नतीजों के बाद गुरुवार को सड़कों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग की और विपक्षी नेताओं से अरब पार्टियों के साथ मिलकर संयुक्त यहूदी-अरब सरकार बनाने का आह्वान किया. प्रदर्शन नेतन्याहू के आवास के बाहर भी हुए, जहां गाजा युद्ध खत्म करने की मांग भी उठी.
प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कीं और पुलिस से भिड़ंत भी हुई. कुछ लोग सड़क पर बैठकर नारे लगाते रहे, जबकि कुछ ने नेतन्याहू के प्रचार पोस्टर को रौंदा. नारों में “बेन ग्वीर हार गया” जैसे शब्द भी शामिल थे. एक प्लेकार्ड पर लिखा था, “अरब और यहूदी, केवल साथ मिलकर हम जीतेंगे.” कुछ प्रदर्शनकारियों ने इजरायल को लोकतंत्र की बजाय रंगभेद राज्य बताने वाला बैनर भी उठाया.
अलग से हेर्जलिया में विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइज़नकोट के आवास के बाहर भी प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारियों ने “बिना साझेदारी के कोई बदलाव नहीं” का नारा लगाते हुए आइज़नकोट से अरब पार्टियों के साथ सहयोग करने की अपील की. तेल अवीव-याफा के डिप्टी मेयर अमीर बदरान भी इस विचार के समर्थन में मौजूद थे.
पूरी काउंटिंग के बाद नेतन्याहू के ब्लॉक को 53 सीटें मिलीं, जबकि मुख्य विपक्षी दलों को 48 सीटें. 120 सदस्यीय क्नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं, इसलिए दोनों गुट बहुमत से दूर रहे. नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनी (27 सीटें), जबकि आइज़नकोट की याशर 21 सीटों के साथ सबसे बड़ा विपक्षी दल रही.
सबसे बड़ा मोड़ अरब पार्टियों का रहा. जॉइंट लिस्ट को 11 और मंसूर अब्बास की रा’म को 8 सीटें मिलीं, जिससे कुल 19 सीटें बन गईं. ये पार्टियां अब किंगमेकर की भूमिका में हैं. विपक्ष नेतन्याहू को सत्ता से दूर रखने के लिए इनके समर्थन पर निर्भर हो सकता है, चाहे वह औपचारिक गठबंधन हो या अल्पमत सरकार को बाहरी समर्थन.
इजरायल बेयतेनु के प्रमुख अविगडोर लिबरमैन ने साफ कर दिया है कि वे किसी ऐसी सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे या समर्थन नहीं देंगे जो अरब पार्टियों पर निर्भर हो. उन्होंने आइज़नकोट, नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड से संपर्क भी काट लिया है. राष्ट्रपति आइजक हर्जोग राजनीतिक नेताओं से नया चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गठबंधन बनाने की राह अभी भी कठिन बनी हुई है.