चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारों और 1990 के दशक के आतंकी मामलों में सजा काट रहे 'बंदी सिंहों' की रिहाई की मांग को लेकर शनिवार को चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर भीषण गतिरोध देखने को मिला। कौमी इंसाफ मोर्चा के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के आवास (लोक भवन) का घेराव करने के लिए कूच किया। जब भीड़ ने बैरिकेड्स पर चढ़कर ट्रैक्टरों से कंटीले तार हटाने का प्रयास किया, तो सुरक्षा बलों ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें खदेड़ दिया। इस टकराव के बाद मोर्चे ने 21 अगस्त को संपूर्ण 'पंजाब बंद' का ऐलान कर दिया है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं।
कौमी इंसाफ मोर्चा का दावा है कि अपनी निर्धारित सजा पूरी होने के बावजूद कई कैदी अभी भी जेलों में बंद हैं। मोर्चा मुख्य रूप से जिन कैदियों की रिहाई की मांग कर रहा है, उनमें शामिल हैं:
जगतार सिंह हवारा (1995 में पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास)
बलवंत सिंह राजोआणा (बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी)
जगतार सिंह तारा (बेअंत सिंह हत्याकांड से जुड़ा दोषी)
परमजीत सिंह भेओरा (बेअंत सिंह हत्याकांड में शामिल)
देविंदरपाल सिंह भुल्लर (1993 दिल्ली बम धमाके का दोषी)
गुरदीप सिंह खेहरा
लखविंदर सिंह लखा
गुरमीत सिंह
शमशेर सिंह
राज्यपाल आवास तक कूच को विफल करने के लिए चंडीगढ़ और मोहाली के बीच सभी बॉर्डर पॉइंट्स को पूरी तरह सील कर दिया गया था। बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, कंटीले तार, दंगा रोधी वाहन (Vajra) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया था। निषेधाज्ञा के बावजूद जब बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश हुई, तब पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
'बंदी सिंह' शब्द उन कैदियों के लिए प्रयुक्त होता है जिन्हें 1990 के दशक के उग्रवाद और आतंकी मामलों में दोषी ठहराया गया था। मोहाली के वाईपीएस चौक और चंडीगढ़ सेक्टर 52-53 के पास 7 जनवरी 2023 से कौमी इंसाफ मोर्चा लगातार पक्का मोर्चा लगाए बैठा है। इस आंदोलन को शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे), एसएडी (पुनर सुरजीत) और कई निहंग जत्थेबंदियों का समर्थन प्राप्त है। 21 अगस्त को आहूत पंजाब बंद ने प्रशासनिक मशीनरी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।