चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच सूबे की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पंजाब कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह और गुटबाजी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है, जिससे पार्टी चुनाव से पहले टूटने की कगार पर खड़ी दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों से आ रहे ताज़ा इनपुट्स के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) का खेमा इस समय पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाए हुए है। चन्नी समर्थकों ने कांग्रेस हाईकमान (दिल्ली दरबार) पर सीधा और कड़ा दबाव बनाया है कि यदि चन्नी को पंजाब में संगठन की वास्तविक ताकत (पॉवर) नहीं सौंपी गई, तो पार्टी दो धड़ों में विभाजित हो सकती है।
राजा वड़िंग को हटाने की मांग, हाईकमान पर भारी दबाव
पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी इस गृहयुद्ध की मुख्य वजह प्रदेश अध्यक्ष (PPCC Chief) अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (Amarinder Singh Raja Warring) और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच वर्चस्व की जंग है। रविवार, 12 जुलाई 2026 को दिल्ली में हुई एक गुप्त रणनीतिक बैठक के बाद चन्नी गुट के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे राजा वड़िंग के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। चन्नी समर्थकों का आरोप है कि वर्तमान प्रदेश नेतृत्व पुराने और कद्दावर नेताओं को किनारे कर रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। चन्नी गुट ने कांग्रेस आलाकमान के सामने दो टूक मांग रखी है कि राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद से तुरंत हटाकर कमान चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपी जाए, ताकि दलित और ओबीसी (OBC) वोट बैंक को साधा जा सके।
कैप्टन और सिद्धू प्रकरण की तरह गहराया संकट, टूटने के कगार पर पार्टी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस का यह मौजूदा संकट साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले हुए 'कैप्टन अमरिंदर सिंह बनाम नवजोत सिंह सिद्धू' विवाद की याद दिलाता है। उस वक्त की अंदरूनी कलह के कारण कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था और आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था। अब ठीक वैसे ही हालात 2027 के चुनाव से पहले बनते दिख रहे हैं। चन्नी खेमे के एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इस संगठनात्मक विवाद को अगले एक हफ्ते के भीतर नहीं सुलझाया, तो कई विधायक और पूर्व मंत्री पार्टी छोड़कर एक नया मोर्चा बना सकते हैं या अन्य दलों का रुख कर सकते हैं।
आलाकमान असमंजस में, सुखजिंदर रंधावा और प्रताप बाजवा भी रेस में
चन्नी गुट की इस खुली बगावत और अल्टीमेटम ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। जहां एक तरफ राजा वड़िंग को हटाना हाईकमान के लिए आसान नहीं है, वहीं दूसरी तरफ चन्नी की नाराजगी पूरी पार्टी को पंजाब में गर्त में धकेल सकती है। इस बीच, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा (Partap Singh Bajwa) और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) का गुट भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और वे खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। फिलहाल, दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक बैठकों का दौर जारी है और देखना होगा कि कांग्रेस इस संभावित टूट को कैसे रोक पाती है।