Rahat Fateh Ali Khan: हम पाकिस्तानी मोमिन हैं, हमें तो भारत देश के काफिरों का बस पैसा, शराब और शबाब पसंद है, और अच्छी बात ये भी है कि उन्हें इससे कोई परेशानी भी नहीं होती. ये शब्द थे पाकिस्तानी सिंगर राहत फतेह अली खान के भारतीयों के लिए, जो भारतीय अभी भी पाकिस्तानी कलाकारों की तरफदारी कर रहे हैं, जिन्हें लगता है कि कला के लिए कोई सरहद नहीं होनी चाहिए, जिन्हें लगता है कलाकारों का कोई मजहब नहीं होता, ये खबर उन लोगों को ध्यान से पढ़नी चाहिए. क्योंकि जिन पाकिस्तानियों का वो समर्थन करते हैं वो उन्हें क्या बोलते हैं इस की सच्चाई इसी खबर से समझ में आ जाएगी.
भारतीय राजनयिक के सामने दिया था बयान
ये बात साल 1990 की है, जब राहत एक हवाई सफर पर था, उसी विमान में इस्लामाबाद में पोस्टेड भारतीय राजनयिक भी सफर कर रहे थे, भारतीय अधिकारी इस सिंगर के फैन थे और आसपास ही बैठे भी थे, बस बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन इस गायक को एक गलतफहमी हो गई, उसने भारतीय राजनयिक को पाकिस्तानी राजनयिक समझ लिया, और बस भारत के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने भी शुरू कर दिया, इसके साथ-साथ सिंगर ने भारीयों को काफिर कहते हुए जम कर उल्टेसीधे शब्द बोलना जारी रखा, और अपनी इसी बातचीत में राहत फतेह ने कहा कि मोमिन होने के नाते वो सिर्फ काफिरों के देश के शराब, शबाब और पैसे को ही पसंद करता है. लेकिन जब प्लेन ने लैंड किया तो राजनयिक ने बताया कि वो पाकिस्तानी नहीं बल्कि भारतीय हैं, ये बात सुनते ही राहत के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो माफी मांगने लगा, गिड़गिड़ाने लगा.
भारत में कर दिया था ब्लैकलिस्ट
माफी मांगने के बावजूद भी भारतीय राजनयिक ने अपना फर्ज निभाया, उन्होंने इसे ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की, और इसी सिफारिश पर भारत सरकार ने कई सालों को लिए राहत को ब्लैकलिस्ट कर दिया, अब राहत को काफिरों के देश में किसी भी तरह से परफॉर्म करने की परमिशन नहीं थी. इस फैसले के बाद इस गद्दार गायक की इनकम बेहद ही कम हो गई, क्योंकि ज्यादा पैसा तो सिर्फ काफिरों के देश से ही मिलता था, पाकिस्तान में तो केवल चिल्लर देकर ही इन लोगों से प्रोग्राम कराए जाते थे. फिर एक समय ऐसा आया आर्थिक तंगी से जूझ रहे राहत को भारत ने ब्लैकलिस्ट से हटा दिया.