नई दिल्ली: इंडिया गठबंधन के सांसदों का चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च आज आकाशवाणी भवन परिसर में लंबे धरने में तब्दील हो गया. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन के अंदर गेट नंबर 4 के पास एक पेड़ के नीचे बैठ गए. बाद में राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया.
महीने बदल गए, लेकिन राहुल गांधी का तेवर नहीं बदला. जुलाई में वे प्रधानमंत्री आवास के बाहर सड़क पर धरने पर बैठे थे. अब अक्टूबर में वे आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर धरने पर हैं. तब निशाने पर गृह मंत्री अमित शाह थे, अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं. युवाओं पर लाठीचार्ज की मांग अब 13 करोड़ मतदाताओं के सवाल तक पहुंच गई है. सांसद कह रहे हैं कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती, वे यहीं बैठे रहेंगे.
क्या है विपक्ष की मांग?
विपक्षी सांसद पहले संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा हुए, फिर निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकालने निकले. उनकी मुख्य मांगें हैं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर उठे सवालों का जवाब और मतदान व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बहाल करना. विपक्ष का कहना है कि इन सवालों के जवाब के बिना लोकतंत्र पर सवाल खड़े रहेंगे.
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए संसद मार्ग, नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के पास पुलिस ने भारी बैरिकेड लगा दिए. पानी की बौछार वाली गाड़ियां भी तैनात की गईं. रास्ता बंद होने पर सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी.
बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी
इसी दौरान राहुल गांधी अचानक एक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लहराया. तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी भी बैरिकेड पर दिखे. पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लेने की कोशिश की. अखिलेश यादव, डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई सांसदों को बस में बैठाया गया.
प्रियंका गांधी को भी हिरासत के लिए बस में ले जाया गया, लेकिन वे जल्द उतर गईं. इसके बाद राहुल गांधी स्वागत द्वार की तरफ बढ़े और आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर दाखिल हो गए. प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और इमरान प्रतापगढ़ी भी उनके साथ रहे. सभी नेता गेट के पास पेड़ के नीचे बैठ गए. पुलिस ने परिसर खाली करने को कहा, लेकिन सांसदों ने मना कर दिया. उनका कहना था कि चुनाव आयोग का दफ्तर यहां से कुछ ही दूरी पर है, चुने हुए सांसदों को वहां जाने से क्यों रोका जा रहा है.
राहुल गांधी का बयान
मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि करीब 300 सांसदों को रोका गया और यहां बैठा दिया गया. चुनाव आयोग यहां से लगभग 50 गज की दूरी पर है, फिर भी आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने मिलकर देश में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है.
उन्होंने ‘वोट चोरी’ का आरोप दोहराया और कहा कि देश के साथ जो हुआ है, उसे देशद्रोह कहा जाता है. ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं और उन्हें इस्तीफा देना होगा. इससे पहले दोपहर में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की थी. आकाशवाणी भवन के अंदर-बाहर सुरक्षा कड़ी है. पुलिस अधिकारी बातचीत कर रहे हैं, लेकिन धरना अभी जारी है.
जुलाई वाला धरना भी याद आया
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी लंबे समय तक धरने पर बैठे हों. जुलाई में वे पीएम आवास के बाहर करीब तीन घंटे धरने पर बैठे थे. तब मुद्दा कॉकरोच मार्च के दौरान लाठीचार्ज को लेकर अमित शाह से जवाब मांगना था. इस बार मांगें और कार्यक्रम पहले से तय हैं. तब युवाओं की बात थी, अब आम लोगों की. भाजपा और चुनाव आयोग इन आरोपों को राजनीतिक बताते रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बता रहा है. फिलहाल धरना-प्रदर्शन जारी है. आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.